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सर्वकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

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पृष्ठ 258

मशीमहि तस्य त इन्द्रेण पीतस्य मधुमत"
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भ - क्ष - म - शी - म - हि
Yes, "भक्षमशीमहि".

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अग्निष्टोम : माध्यन्दिनम् सवनम्
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[ ८ । २, ३ । ] बौधायनश्रौतसूत्रम् । २३७

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Include the page header and all printed lines.सादयति॑ तथा सांकाशिनेन पथा पृष्ट्या᳭ स्तृणाति संततां
गार्हपत्यादाहवनीयात्॑ ॥ २ ॥
अथान्तरेण हविर्धाने उपविश्य दधिघर्माय दधि याचति॑
तदाहृतमवेक्षते ज्योतिरसि वैश्वानरं पृश्नियै दुग्धमिति॑ बर्हिषौ
ऽन्तर्धाय क᳭से वा चमसे वा गृह्णाति यावती द्यावापृथिवी
महिम्ना यावच्च सप्त सिन्धवो वितस्थुः । तावन्तमिन्द्र ते ग्रह