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सर्वकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

पृष्ठ 195, कुल 774 में से

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पृष्ठ 195

तग्"?
Look at "तद्दतग्": त + द्द + त + ग्. In TS: "तदृताय सपर्यत" -> here "तद्दतग्"?
Wait, look at the letters: त, then द् + द? Or द् + ध? Or दृत?
Let's zoom in on that word:
त - द्द - त - ग्
Wait, look at the middle conjunct:
It has top loop, bottom loop: 'द्द' or 'द्ब' or 'दृ'?
Wait, in L8 later: "दूरेदृशे": 'दू', 'रे', 'दृ', 'शे'. Notice how 'दृ' is written in 'दूरेदृशे': द with a vocalic r curve below!
Now look at "तद्दतग्": it does NOT have a vocalic r curve below. It has a second loop under 'द': 'द्द'!
Wait, could it be 'तद्दतग्'? Yes, exactly 'तद्दतग्'!

Line 9:
दिवस्पुत्राय सूर्याय श्श्सतेत्यथैतत्सोमवाहनमनो ऽग्रेण शाला-
Wait, "श्श्सतेत्यथैतत्..."?
Look at "श्श्सतेति":
श् + श + स + ते + ति = श्श्सतेति?
In TS 1.2.9: "दिवस्पुत्राय सूर्याय शंसत" -> सूर्याय शंसत!
Here