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सर्वकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

पृष्ठ 169, कुल 774 में से

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पृष्ठ 169

/ L4: क्रामत्यो॑
Wait, in L3:
द (da)
ङ्ङ (ṅṅa)
ति (ti) - with anudatta? Wait, in L3:
उदङ्ङुति- or उदङ्ङति-?
Look at L3: ऽव॑दायोदङ्ङति-
L4: क्रामत्यो॑
In L9:
दक्षिण॒तो ऽव॑दायोदङ्ङति॒क्रामत्यो॑ (ति has anudatta: ति॒)
In L15-16:
L15 ends with: दक्षिण॒तो ऽव॑दायो- १५
L16: दङ्ङति॑क्रामत्यो॑ (ति has udatta: ति॑)

Wait, let's verify line 20:
"मित्य॒ग्नाव॑नुप्रहरत्य॑थैने सꣳस्रावेणा॑भि॒जुहोत्य॑थ दक्षिण॒तो ऽत्या- २०"
L21: "क्रम्य यथा॒यतनꣳ स्रुचौ साद॑यित्वा यज्ञोपवीतानि कुर्वते॑ '"
Here: "दक्षिणतो ऽत्याक्रम्य" (dakṣiṇato 'tyākramya)! Exactly the same root अति + क्रम्!

Let's check L17:
"कव्यवाहनꣳ स्विष्टकृतꣳ स्व॒धा कु॑र्विति