बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)
Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary
आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा
DevanagariHindipublished774 पृष्ठ
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सादयित्वा स्रुचौ प्रवरं प्रवृणीते ऽ प्रसिद्धꣳ होतारं वृणीते ऽ
सीदति होता ऽ प्रसवमाकाङ्क्षति ऽ प्रसूतः स्रुचावादायात्या-
क्रम्याश्राव्याह समिधो यजेति ऽ वषट्कृते जुहोति यज यजेति
चतुर्थाष्टमयोः समानयमानो ऽ ऽष्टमे सर्वꣳ समानयते ऽ नव
५ प्रयाजानिष्ट्वोदङ्ङत्याक्रम्य सꣳस्रावेणानुपूर्वं१ हवीꣳष्यभिघारय-
त्य॑थाग्नये सोमायेत्याज्यभागाभ्यां चरत्य॑थानुपूर्वं१ हविर्भि-
श्चरति ऽ प्रसिद्धमा मारुता॑द्विश्वेभ्यो देवेभ्यो ऽनुब्रूहि विश्वा-
न्देवान्यजेत्यामिक्षया चरत्य्॑ पाङ्क्तैककपालेन चरति द्यावा-
पृथिवीभ्यामनुब्रूहि द्यावापृथिवी यजेत्य॑थ स्विष्टकृता चरत्य॑-
१० चैतानि मेक्षणान्याहवनीये ऽनुप्रहरत्य॑थै