सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

पृष्ठ 126, कुल 774 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 126

" ? No!
Wait, let's look at line 18 again:
"अग्निष्टद्धोता क्रतुविद्विजानन्यजिष्ठो देवाँ् ऋतुरो यजातीति॑"
Wait! In line 18:
"यजिष्ठो देवा..."
RV 10.2.1:
"अग्निर्होता क्रतुविद्विजानन्यजिष्ठो देवाँ ऋतुरो यजाति" (in TB 2.4.1.3: अग्निष्टद्धोता क्रतुविद्विजानन्यजिष्ठो देवाँ ऋतुरो यजाति)
TB 2.4.1.3 has: "अग्निष्टद्धोता क्रतुविद्विजानन्यजिष्ठो देवाँ ऋतुरो यजाति"!
Yes!! TB 2.4.1.3 has exactly: "अग्निष्टद्धोता क्रतुविद्विजानन्यजिष्ठो देवाँ ऋतुरो यजाति"!
Now look at what is printed in line 18 for "देवाँ":
It is: "देवाँ्" or "देवाँ"?
Wait! Why is there that glyph after "देवा"?
Look at that glyph:
It is: "देवा" + candrabindu?
Wait! Where is the candrabindu?
The crescent with dot is directly above 'वा'!
And what is after 'वा'?
It is: an avagraha?