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सर्वकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

पृष्ठ 122, कुल 774 में से

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यथेह होता वृतो मनवै यन्निषद्व । प्र मे ब्रूत भागधेयं
यथा वो येन पथा हव्यमा वो वहानि ॥१ तदद्य वाचः प्रथमं
मसीय येनासुराँ अभि देवा असाम । ऊर्जाद उत यज्ञि-
यासः पञ्च जना मम होत्रं जुषध्वम् ॥ नमो महद्भ्यो नमो
५ अर्भकेभ्यो नमो युवभ्यो नम आशिनेभ्यः । यजाम देवान्यदि
शक्नवाम मा ज्यायसः शँसममा वृक्षि देवा इत्यथ स्रुगादापनेन
स्रुचावादाप्य यथादेवतँ हविषो यजत्यथ वषट्काराणामनु-
मन्त्रणो२ वषट्कार मा मे प्रवृणसो अहं त्वां३ वृहता मन उप-
ह्वये मातरिश्वना प्राणाग्न मे वाचँ४ ह्वयं देवेभ्यो ऽभिवहा-
१० स्योजः सहः सह ओजो वागिति ' यद्यु वा५ अभ्यग्रा५
वषट्काराः५ स्युरेतावतावानुमन्त्रयत ओजः सह ओजो वागित्यथ
होतुर्द्विरङ्ग