बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशहीद ग्रंथ-माला
संपादक : बनारसीदास चतुर्वेदी
इस माला का मुख्य उद्देश्य भारतीय जनता को उन अमर शहीदों की बलिदान-
गाथाओं से परिचित कराना है जिन्होंने हँसते-हँसते स्वाधीनता की बलिवेदी पर
अपने प्राणों की आहुति दे दी, जिनकी कीर्ति देश के भावी सपूतों को सदा प्रेरणा
देती रहेगी। इस माला की पुस्तकों की मुख्य विशेषता इनकी प्रामाणिकता है।
भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन का इतिहास : मन्मथनाथ गुप्त
ब्रिटिश सरकार ने छपते ही यह पुस्तक जब्त कर ली थी। जब्ती के पश्चात्
इसके तीन संस्करण और हुए तथा इस विषय पर यह सारे भारतीय साहित्य में
सर्वाधिक प्रामाणिक ग्रंथ माना गया। यह इसका नवीन संस्करण है।
यश की धरोहर : (भगवानदास माहोर, सदाशिवराव मलकापुर, शिव वर्मा)
भारतीय क्रान्ति के यज्ञ मे अपने प्राणों की बलि देने वाले युवकों सरदार
भगतसिंह, राजगुरु, चन्द्रशेखर आजाद, नारायणदास खरे तथा सुखदेव के चिर-
स्मरणीय मार्मिक संस्मरण।
आत्मकथा : रामप्रसाद बिस्मिल
जेल में फाँसी से दो दिन पूर्व लिखी गई यह आत्मकथा हिन्दी की सर्वश्रेष्ठ
आत्मकथा है। यह आत्मकथा हाथ मे लेते ही हृदय मे एक सिहरन-सी होने लगती
है। भारत के सभी सार्वजनिक तथा व्यक्तिगत पुस्तकालयों में इस आत्मकथा का
होना अत्यंत आवश्यक है।
गणेश शंकर विद्यार्थी : (देवव्रत शास्त्री, भूमिका : जवाहरलाल नेहरू)
अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी की सजीव बलिदान गाथा, जो हमें
स्वतंत्रता और न्याय के लिए बड़े से बड़ा बलिदान देने को प्रेरित करती है।
बन्दी जीवन : शचीन्द्रनाथ सान्याल
गदर पार्टी का इतिहास : (प्रीतमसिंह पंछी)
इसमें बड़ी खोज के साथ यह दिखाया गया है कि अमेरिका में भारतीयों ने
गदर पार्टी का संगठन कैसे किया । उनके त्याग और बलिदान की कथा बड़े
रोमांचकारी शब्दों में लिखी गई है। यह ग्रंथ भारतीय स्वाधीनता-संग्राम के
इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
आत्माराम एण्ड संस
कश्मीरीगेट, दिल्ली-110006