बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
पृष्ठ 11, कुल 408 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रकाशकीय
भारत के उन महाप्राण वीर देशभक्तों के जीवन तथा कार्यों का इतिहास
अभी तक लगभग अप्रकट ही है, जिन्होंने शस्त्रबल के सहारे स्वदेश को
विदेशी दासता से मुक्त कराने का प्रयास किया था । महाशक्तिशाली ब्रिटिश
साम्राज्य से मोर्चा लेनेवाले स्वतंत्रता के इन सैनिकों की जीवन-कथाएं इतनी
शौर्यपूर्ण और त्याग-बलिदान की भावनाओ तथा घटनाओ से परिपूर्ण है कि एक
उत्कृष्ट काव्य की भाँति हृदय पर स्थायी प्रभाव डालती है। हमारे इतिहास की
यह ऐसी अमूल्य निधि है, जो युग-युगों तक हमें प्रेरणा देने की सामर्थ्य रखती है ।
'शहीद ग्रन्थ माला' के अन्तर्गत प्रकाशित प्रस्तुत ग्रन्थ 'बन्दी जीवन' हमारे
इस क्रान्तिकारी आन्दोलन के इतिहास का वह भाग है, जिसमें उन रहस्यात्मक
रोमांचकारी घटनाओं का अत्यन्त सजीव और प्रामाणिक विवरण है, जिनके
कारण एक दिन भारत के विदेशी शासको की नीद हराम हो गई थी । 'बन्दी
जीवन' के लेखक श्री शचीन्द्रनाथ सान्याल ने स्वयं इन घटनाओ मे प्रमुख भाग
लिया था । वीरश्रेष्ठ रासबिहारी बोस के दाहिने हाथ के रूप मे इस क्रान्ति सघर्ष
के संचालन का उत्तरदायित्वपूर्ण भार उन पर था, जिसे उन्होने बडी गम्भीरता
और जिम्मेदारी के साथ निबाहा था, तथा इसके लिए कालान्तर मे बड़ी भीषण
यातनाएँ शचीन्द्र बाबू को सहन करनी पड़ी थी । यही कारण है कि क्रान्तिकारी
आन्दोलन का यह घटनाक्रम उन्होने ऐसी मर्मस्पर्शी भाषा मे लिखा है कि अनेक
वर्षों तक क्रान्तिकारी संगठन द्वारा युवको को अपने मार्ग मे दीक्षित करने के लिए
इस ग्रन्थ का उपयोग किया जाता रहा है। यह ग्रन्थ आज से लगभग चालीस वर्ष
पूर्व दो भागो मे हिन्दी मे प्रकाशित हुआ और प्रकाशित होते ही जब्त कर लिया
गया । फिर भी इसके अनेक सस्करण प्रकाशित होते रहे और हाथों-हाथ बिकते
गए । अब बहुत वर्षों से यह ग्रन्थ अप्राप्य था ।
'बन्दी जीवन' के प्रस्तुत संस्करण मे पूर्व प्रकाशित दो भागो के अतिरिक्त
वह तीसरा भाग भी है, जो अभी तक पुस्तक रूप मे प्रकाशित नही हो सका था ।
इसके साथ ही 'कुछ पूरक तथ्य' शीर्षक से एक पृथक् अध्याय भी है जिसमें ग्रन्थ
मे वर्णित घटनाओ का वह ब्यौरा दिया गया है, जो अंग्रेजों के शासनकाल में नही
दिया जा सकता था । हमे आशा है कि पाठक 'शहीद ग्रन्थ माला' के अन्य ग्रन्थों
की ही भाँति 'बन्दी जीवन' का भी हार्दिक स्वागत करेंगे ।