सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
आयुर्वेद दर्शन

आयुर्वेद दर्शन

Ayurveda Darshan

वैद्य महादेव चन्द्रशेखर पाठक द्वारा

स्रोत: 1949 Edition · De Ra Ekatara Indoor · 1949 (उद्गम)

DevanagariHindipublished235 पृष्ठ

पृष्ठ 17, कुल 235 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 17

३

वातपित्त-क्षेप्माका ओं का इतिहास...४७
पहिला वर्गीकरण...४९
ओज, तेज व धातुप्रसाद...५१
ओज तेज ऊष्मादिकों का क्षेप्मपित्तवातों में समन्वय...५९
वासु के विषय में...६४
दूसरा वर्गीकरण...६७
वातपित्त-क्षेप्माओं की प्राकृत वैकृत अवस्थाएँ...६८
अणु अवयवों के अथवा गर्भांकुर के रासायनिक संगठन में क्षेप्मपित्तवात...७०
दोष प्रकृति...७६
वातादिकों का द्वैविध्य...८०
ब्रह्मादिगुण प्रधानता वादियों की पांचभौतिकी प्रकृति...८०
वातपित्त-क्षेप्माओं का लोकगत अधिष्ठान...८१
अशीषोसवाद...८२
वातकला कर्लीब परिषद...८५
तीसरा वर्गीकरण...९०
हरिणयाक्ष कुशिक और षड्धातुवाद...९१
रसवाद का प्रतिवाद...९१
पुरुषरोगोत्पत्ति में षड्धातुओं का समर्थन...९१
भारद्वाजीय गर्भावक्रांति का खंडन...९२
षड्धातुवादियों का सामान्य सिद्धांत...९३
चेतनाधातु...९३