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सर्वकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 892, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 892

कृणोत्वप्रमायुकं रथजूतिमनागसम्.. (३)
पृथ्वी पर उत्पन्न हुआ आंजन कल्याण करने वाला तथा पुरुषों को जीवित करने वाला
है. यह आंजन हमें मरण रहित, रथ के समान तीव्र गति वाला तथा पाप रहित करे. (३)
प्राण प्राणं त्रायस्वासो असवे मृड. निर्ऋते निर्ऋत्या नः पाशेभ्यो मुञ्च..
(४)
हे प्राण रूप आंजन! तुम मेरे प्राण की रक्षा करो तथा अकाल में नष्ट न होने वाला
बनाओ. हे प्राणरूप आंजन! तुम प्राणों को सुखी बनाओ. हे निर्ऋति रूप आंजन! हमें
निर्ऋति के फंदों से छुड़ाओ. (४)
सिन्धोगर्भो ऽ सि विद्युतां पुष्पम्.
वातः प्राणः सूर्यश्चक्षुर्दिवस्पयः.. (५)
हे आंजन! तुम सागर के गर्भ और बिजली के फूल हो. तुम वायु के प्राण, सूर्य के नेत्र
और आकाश के जल हो. (५)
देवाञ्जन त्रैककुद परि मा पाहि विश्वतः.
न त्वा तरन्त्योषधयो बाह्याः पर्वतीया उत.. (६)
हे त्रिककुद पर्वत पर उत्पन्न एवं देवों के द्वारा अपनी रक्षा के लिए धारण किए जाते हुए
आंजन! सभी ओर से हमारी रक्षा करो. पर्वत से अधिक ऊंचे स्थान पर उत्पन्न ओषधियां
अर्थात् जड़ीबूटियां तुम्हारे प्रभाव को नहीं लांघ सकतीं. (६)
वी ३ दं मध्यमवास्पद् रक्षोहामीवचातनः.
अमीवाः सर्वाश्चातयन् नाशयदभिभा इतः.. (७)
राक्षसों का विनाश करने वाला तथा रोगों को नष्ट करने वाला यह आंजन सभी रोगों का
विनाश करता हुआ तथा सभी रोगों को पराजित करता हुआ प्रसिद्ध हो. (७)
बह्वी ३ दं राजन् वरुणानृतमाह पूरुषः.
तस्मात् सहस्रवीर्य मुञ्च नः पर्यंहसः.. (८)
हे राजा वरुण! यह मनुष्य सवेरे से शाम तक अनेक प्रकार का असत्य भाषण करता है.
इस के असत्य भाषण को क्षमा करो. हे हजारों प्रकार की शक्ति वाले आंजन! इस असत्य
भाषण रूप बाण से हमें सभी ओर से छुड़ाओ. (८)
यदापो अघ्न्या इति वरुणेति यदूचिम.
तस्मात् सहस्रवीर्य मुञ्च नः पर्यंहसः.. (९)
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