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सर्वकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 846, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 846

प्राणियों का संहार करने वाले काल के कारण कांपती हुई पृथ्वी हमारे कंपन रूपी दोष
को दूर करने वाली बने. ज्वाला के रूप में गिरने वाली उल्काओं के स्थान हमें शांति प्रदान
करें. दूध के स्थान पर रक्त देने वाली गाएं तथा फटती हुई धरती हमें शांति प्रदान करे. (८)
नक्षत्रमुल्काभिहतं शमस्तु नः शं नोऽभिचाराः शमु सन्तु कृत्याः.
शं नो निखाता वल्गाः शमुल्का देशोपसर्गाः शमु नो भवन्तु.. (९)
आकाश से गिरती हुई उल्काओं से अपने स्थान से पतित होने वाले नक्षत्र हमें शांति
प्रदान करें. शत्रुओं द्वारा हमें मारने के निमित्त किए गए अभिचार कर्म (जादूटोने, टोटके) तथा
पिशाचियां हमारे उपद्रवों को शांत करने वाली हों. भूमि खोद कर तथा हड्डी, केश आदि
लपेट कर बनाई गई विष पुत्तलिकाएं हमें शांति देने वाली हों. आकाश से गिरने वाली उल्काएं
देखने से जो अनिष्ट होता है, उसे उल्काएं ही शांत करें. राष्ट्र में होने वाले विघ्न भी शांत हों.
(९)
शं नो ग्रहाश्चान्द्रमसाः शमादित्यश्च राहुणा.
शं नो मृत्युर्धूमकेतुः शं रुद्रास्तिग्मतेजसः.. (१०)
चंद्र मंडल भेदक मंगल आदि ग्रह हमें शांति प्रदान करें. राहु के द्वारा ग्रसित सूर्य हमारी
शक्ति का निमित्त बने. मारक धूमकेतु हमें शांति देने वाला हो. तीक्ष्ण तेज वाले रुद्र हमें शांति
देने वाले हों. (१०)
शं रुद्राः शं वसवः शमादित्याः शमग्नयः.
शं नो महर्षयो देवाः शं देवाः शं बृहस्पतिः.. (११)
रुद्र, वायु, आदित्य और अग्नि देव हमारे लिए शांति के कारण बनें. अतिमान तेज वाले
सात महर्षि, इंद्र आदि देव और देवों के पुरोहित बृहस्पति हमारी शांति के कारण बनें. (११)
ब्रह्म प्रजापतिर्धाता लोका वेदाः सप्तऋषयो ऽग्नयः.
तैर्मे कृतं स्वस्त्ययनमिन्द्रो मे शर्म यच्छतु ब्रह्मा मे शर्म यच्छतु.
विश्वे मे देवाः शर्म यच्छन्तु सर्वे मे देवाः शर्म यच्छन्तु.. (१२)
सच्चिदानंद लक्षण वाला ब्रह्म, प्रजापति, चार मुखों वाले ब्रह्मा, सात लोक, अंगों सहित
चार वेद, सात ऋषि तथा तीन अग्नियां मुझे शांति देने वाली हों. इन सब ने मुझे स्वस्त्य यमन
अर्थात् शांति प्रदान की है. इंद्र और ब्रह्मा मुझे सुख प्रदान करें. विश्वे देव मुझे सुख प्रदान करें
तथा विश्वे देव मुझे सुख प्रदान करें. (१२)
यानि कानि चिच्छान्तानि लोके सप्तऋषयो विदुः.
सर्वाणि शं भवन्तु मे शं मे अस्त्वभयं मे अस्तु.. (१३)
सप्त ऋषि लोक में जिन शक्तियों को जानते थे, वे सब मुझे सुख देने वाली हों, मुझे