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सर्वकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 843, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 843

व्याधियों से पूर्ण मूल नक्षत्र मेरे लिए कल्याणकारी हो. (३)
अन्नं पूर्वा रासतां मे अषाढा ऊर्जं देव्युत्तरा आ वहन्तु.
अभिजिन्मे रासतां पुण्यमेव श्रवणः श्रविष्ठाः कुर्वतां सुपुष्टिम्.. (४)
जल देवता का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र मुझे खाने योग्य उत्तम अन्न दे. विश्वे देवों का उत्तराषाढ़ा
नक्षत्र हमें बलदायक रस प्रदान करे. ब्रह्म देवता का अभिजित नक्षत्र मुझे पुण्य दे. विष्णु देव
का श्रवण नक्षत्र तथा वसु देवता का धनिष्ठा नक्षत्र भी भलीभांति मेरा पालन करे. (४)
आ मे महच्छतभिषग् वरीय आ मे द्वया प्रोष्ठपदा सुशर्म.
आ रेवती चाश्वयुजौ भगं म आ मे रयिं भरण्य आ वहन्तु.. (५)
इंद्र देव का शतभिषा नक्षत्र, अजैकपाद का पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र तथा अहिर्बुध्न्य देव का
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र हमारे लिए महान फल दे और सुसज्जित घर प्रदान करे. पूषा देव का
रेवती नक्षत्र तथा अश्विनीकुमारों का अश्विनी नक्षत्र मुझे सौभाग्यशाली बनाए. यम देवता का
भरणी नक्षत्र मुझे ऐश्वर्य प्रदान करे. (५)
सूक्त-८ देवता—नक्षत्र
यानि नक्षत्राणि दिव्य १ न्तरिक्षे अप्सु भूमौ यानि नगेषु दिक्षु.
प्रकल्पयंश्रन्द्रमा यान्येति सर्वाणि ममैतानि शिवानि सन्तु.. (१)
जो नक्षत्र अंतरिक्ष अर्थात् आकाश में, जलों में, भूमियों तथा पर्वतों पर एवं दिशाओं में
हैं तथा चंद्रमा जिन नक्षत्रों को प्रकट करता हुआ उदय होता है, वे नक्षत्र मुझे सुख देने वाले
हों. (१)
अष्टाविंशानि शिवानि शग्मानि सह योगं भजन्तु मे.
योगं प्र पद्ये क्षेमं च क्षेमं प्र पद्ये योगं च नमो ऽहोरात्राभ्यामस्तु.. (२)
देखने में सुख देने वाले तथा सुख प्रदान करने वाले जो अट्ठाईस नक्षत्र हैं, वे एकसाथ
मिल कर मुझे प्राप्त हों एवं मुझे सुख प्रदान करें. मैं नक्षत्रों की कृपा से अप्राप्त वस्तुओं को
प्राप्त करूं तथा प्राप्त वस्तुओं की सुरक्षा कर सकूं. दिन और रात को मेरा नमस्कार है. (२)
स्वस्तितं मे सुप्रातः सुसायं सुदिवं सुमृगं सुशकुनं मे अस्तु.
सुहवमग्ने स्वस्त्य १ मर्त्य गत्वा पुनरायाभिनन्दन्.. (३)
प्रातःकाल मुझे सुख प्रदान करें, सायं काल मुझे सुख प्रदान करे तथा दिनरात मुझे
सुखी बनाएं. मैं जिस प्रयोजन संबंधी नक्षत्र में प्रस्थान करूं, उस में हरिण आदि शुभ शकुन
के रूप मेरे अनुकूल गति वाले हों. हे अग्नि! सभी नक्षत्रों के देवताओं का अभिनंदन करने
वाले एवं अविनश्वर द्युलोक में जा कर हवि देने वाले हम यजमानों और ऋत्विजों को प्रसन्न
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