अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 835, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंआ त्वाग्न इधीमहि द्युमन्तं देवाजरम्.
यद् घ सा ते पनीयसी समिद् दीदयति द्यवि.
इषं स्तोतृभ्य आ भर.. (८८)
हे प्रकाशमान अग्नि! तुम चमकने वाली और जरा रहित हो. हम तुम्हें प्रकाशित करते
हैं. तुम्हारी अत्यधिक प्रशंसनीय दीप्ति अंतरिक्ष में प्रकाशित हो रही है. हे अग्नि! जो तुम्हारी
स्तुति करते हैं, उन के लिए तुम अन्न प्रदान करो. (८८)
चन्द्रमा अप्स्व १ न्तरा सुपर्णो धावते दिवि.
न वो हिरण्यनेमयः पदं विन्दन्ति विद्युतो वित्तं मे अस्य रोदसी.. (८९)
सुंदर किरणों वाला चंद्रमा जलों के भीतर निवास करता हुआ दौड़ता रहता है. हे द्यावा
पृथ्वी! तुम्हारी स्थिति को सोने के चमकीले सीमा भाग वाली बिजलियां प्राप्त नहीं कर पाती
हैं. तुम दोनों मेरी इस स्तुति को जानो. (८९)