अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 8, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ें२४. आसुरी माया से उत्पन्न वनस्पति का वर्णन १-४
२५. यक्ष्मा नाशक अग्नि की स्तुति १-४
२६. इंद्र, मरुत् व पर्जन्य देव की स्तुति १-४
२७. शत्रु सेना को पराजित और अपनी सेना को आगे
बढ़ाने के लिए इंद्र पत्नी की स्तुति १-४
२८. अग्नि देव की स्तुति १-४
२९. ब्रह्मणस्पति देव की स्तुति १-६
३०. विश्वे देव, आदित्य एवं वसु की स्तुति १-४
३१. इंद्र, यम आदि चार देवों के लिए मंत्रों की आहुति १-४
देव कुबेर से स्वर्ण व रजत आदि
धन देने का आग्रह ४
३२. पृथ्वी और आकाश को नमन १-४
३३. रोग विनाशक जल देव की स्तुति १-४
३४. मधु लता का वर्णन १-५
३५. हिरण्य का वर्णन १-४
दूसरा कांड
सूक्त विषय मंत्र
१. ब्रह्म और आत्मा का वर्णन १-५
२. ब्रह्म के रूप में सूर्य की आराधना १-५
३. स्राव विरोधी ओषधि का वर्णन १-६
४. जंगिड़ वृक्ष से निर्मित जंगिड़ मणि का वर्णन १-६
५. इंद्र की स्तुति १-७
६. अग्नि देव की स्तुति १-५
७. पाप का विनाश करने वाली मणि का गुणगान १-५
८. यक्ष्मा और कुष्ठ रोगों से मुक्त करने वाले तारे १-५
९. वनस्पतियों से निर्मित मणि का वर्णन १-५
१०. द्यावा और पृथ्वी का विभिन्न रोगों में कल्याणकारी होना १-८
११. तिलक वृक्ष से निर्मित मणि १-५
१२. द्यावा, पृथ्वी और अंतरिक्ष के अधिपति देव
क्रमशः अग्नि, वायु और सूर्य का वर्णन १-८
१३. अग्नि, बृहस्पति और विश्वे देव का गुणगान १-५
१४. अग्नि, भूतपति तथा इंद्र की स्तुति १-६
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