अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 755, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंस्वाहाकारेणान्नादेनान्नमत्ति य एवं वेद.. (१६)
इस बात को जानने वाला स्वाहाकार अन्नाद के द्वारा अन्न का सेवन करता है. (१६)
स यदूर्ध्वां दिशमनु व्यचलद् बृहस्पतिर्भूत्वानुव्य चलद् वषट्कारमन्नादं
कृत्वा.. (१७)
जब वह ऊर्ध्व दिशा की ओर चला, तब वषट्कार को अन्नाद बना कर बृहस्पति बनता
हुआ चला. (१७)
वषट्कारेणान्नादेनान्नमत्ति य एवं वेद.. (१८)
इस बात को जानने वाला वषट्कार रूप अन्नाद के द्वारा अन्न का भक्षण करता है.
(१८)
स यद् देवाननु व्यचलदीशानों भूत्वानुव्य चलन्मन्युमन्नादं कृत्वा.. (१९)
जब वह देवता की ओर चला, तब यज्ञ को अन्नाद बना कर ईशान बनता हुआ चला.
(१९)
मन्युनान्नादेनान्नमत्ति य एवं वेद.. (२०)
इस बात को जानने वाला अन्नाद यज्ञ के द्वारा अन्न को खाता है. (२०)
स यत् प्रजा अनु व्यचलत् प्रजापतिर्भूत्वानुव्य चलत् प्राणमन्नादं कृत्वा..
(२१)
जब वह प्रजाओं की ओर चला, तब प्राण को अन्नाद बना कर प्रजापति के रूप में
चला. (२१)
प्राणेनान्नादेनान्नमत्ति य एवं वेद.. (२२)
इस बात को जानने वाला अन्नाद प्राण के द्वारा अन्न का भोजन करता है. (२२)
स यत् सर्वानन्तर्देशाननु व्यचलत् परमेष्ठी भूत्वानुव्य चलद् ब्रह्मान्नादं
कृत्वा.. (२३)
जब वह सब अंतर्देशों की ओर चला, तब ब्रह्म को अन्नाद बना कर प्रजापति बनाता
हुआ चला. (२३)
ब्रह्मणान्नादेनान्नमत्ति य एवं वेद.. (२४)
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