सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 752, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 752

ये पृथिव्यां पुण्या लोकास्तानेव तेनाव रुन्द्धे.. (२)
जिस के घर में ऐसा विद्वान् व्रात्य रात्रि में अतिथि होता है, वह उस के आने के फल से
पृथ्वी के सभी पुण्य लोकों पर विजय प्राप्त करता है. (१-२)
तद् यस्यैवं विद्वान् व्रात्यो द्वितीयां रात्रिमतिथिर्गृहे वसति.. (३)
ये३न्तरिक्षे पुण्या लोकास्तानेव तेनाव रुन्द्धे.. (४)
जिस गृहस्थ के घर में ऐसा विद्वान् व्रात्य रात्रि में निवास करता है, वह गृहस्थ उस के
फल के रूप में अंत में स्थित सभी पुण्य लोकों को जीत लेता है. (३-४)
तद् यस्यैवं विद्वान् व्रात्यस्तृतीयां रात्रिमतिथिर्गृहे वसति.. (५)
ये दिवि पुण्या लोकास्तानेव तेनाव रुन्द्धे.. (६)
यदि ऐसा विद्वान् व्रात्य अतिथि के रूप में गृहस्थ के घर में तीसरी रात्रि में भी निवास
करता है तो उस के फल से वह गृहस्थ आकाश में स्थित समस्त पुण्य लोकों को अपने लिए
मुक्त कर लेता है. (५-६)
तद् यस्यैवं विद्वान् व्रात्यश्चतुर्थीं रात्रिमतिथिर्गृहे वसति.. (७)
ये पुण्यानां पुण्या लोकास्तानेव तेनाव रुन्द्धे. (८)
जिस गृहस्थ के घर में ऐसा व्रात्य चौथी रात निवास करता है तो उस के फल के रूप में
वह गृहस्थ पुण्यात्माओं के सभी लोकों को अपने लिए मुक्त कर लेता है. (७-८)
तद् यस्यैवं विद्वान् व्रात्यो ऽ परिमिता रात्रीरतिथिर्गृहे वसति.. (९)
य एवापरिमिताः पुण्या लोकास्तानेव तेनाव रुन्द्धे.. (१०)
जिस गृहस्थ के घर में ऐसा विद्वान् व्रात्य अनेक रातों तक निवास करता है तो उस के
फल के रूप में वह गृहस्थ अनेक पुण्य लोकों को अपने लिए मुक्त कर लेता है. (९-१०)
अथ यस्याव्रात्यो व्रात्यब्रुवो नामबिभ्रत्यतिथिर्गृहानागच्छेत्.. (११)
कर्षेदेनं न चैनं कर्षेत्.. (१२)
जिस के घर अपनेआप को व्रात्य बताने वाला कोई अव्रात्य आए तो क्या गृहस्थ उसे
अपने घर से भगा दे. नहीं, उस को भी भगाना नहीं चाहिए. (११-१२)
अस्यै देवताया उदकं याचामीमां देवतां वासय इमामिमां
देवतां परि वेवेष्मीत्येनं परि वेविष्यात्.. (१३)
मैं इस देवता को अपने घर में निवास देता हूं. मैं इस से जल ग्रहण करने की प्रार्थना
करता हूं. मैं इस देवता के लिए भोजन परोसता हूं. ऐसा स्वीकार करता हुआ उस के लिए
ebook converter DEMO Watermarks*