अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 740, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंजो इस बात को जानता है, सभी प्राणी उस के मित्र हो जाते हैं। (११)
सूक्त-४ देवता—अध्यात्म, व्रात्य
तस्मै प्राच्या दिशः.
वासन्तौ मासौ गोप्तारावकुर्वन् बृहच्च रथन्तरं चानुष्ठातारौ.. (१-२)
देवताओं ने उस के लिए वसंत ऋतु के दो महीनों को पूर्व दिशा में रक्षक नियुक्त किया.
बृहत्साम और रथंतर को उस का अनुष्ठान करने वाला बनाया। (१-२)
वासन्तावेनं मासौ प्राच्या दिशो गोपायतो बृहच्च
रथन्तरं चानु तिष्ठतो य एवं वेद.. (३)
जो यह बात जानता है, वसंत ऋतु के दो महीने, पूर्व दिशा की ओर से उस की रक्षा
करते हैं. बृहत् साम और रथंतर उस के अनुकूल हो जाते हैं. (३)
तस्मै दक्षिणाया दिशः
ग्रैष्मौ मासौ गोप्तारावकुर्वन् यज्ञायज्ञियं च वामदेव्यं चानुष्ठातारौ.. (४-५)
दक्षिण दिशा की ओर देवताओं ने ग्रीष्म ऋतु के दो महीनों को उस का रक्षक बनाया
तथा यज्ञायज्ञिय और वामदेव्य को उस का अनुष्ठान करने वाला नियुक्त किया. (४-५)
ग्रैष्मावेनं मासौ दक्षिणाया दिशो गोपायतो यज्ञायज्ञियं च वामदेव्यं चानु
तिष्ठतो य एवं वेद.. (६)
जो इस बात को जानता है, दक्षिण दिशा की ओर से ग्रीष्म ऋतु के दो महीने उस की
रक्षा करते हैं तथा यज्ञायज्ञिय और वामदेव उस के अनुकूल होते हैं. (६)
तस्मै प्रतीच्या दिशः.. (७)
वार्षिकौ मासौ गोप्तारावकुर्वन् वैरूपं च वैराजं चानुष्ठातारौ.. (८)
देवताओं ने पश्चिम दिशा में वर्षा ऋतु के दो महीनों को उस का रक्षक नियुक्त किया
तथा वैरूप और वैराज को उस का अनुष्ठान करने वाला नियुक्त किया. (७-८)
वार्षिकावेनं मासौ प्रतीच्या दिशो गोपायतो वैरूपं च वैराजं चानु तिष्ठतो य
एवं वेद.. (९)
जो इस बात को जानता है, वह पश्चिम दिशा की ओर से वर्षा ऋतु के दो महीनों द्वारा
रक्षित रहता है तथा वैरूप और वैराज उस के अनुकूल रहते हैं. (९)
तस्मा उदीच्या दिशः.. (१०)
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