अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 722, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंरयिं च पुत्रांश्चादादग्निर्मह्यमथो इमाम्.. (४)
हे वधू! सोम ने तुझे गंधर्व को दिया. गंधर्व ने तुझे अग्नि को प्रदान किया तथा अग्नि ने
तुझे मेरे लिए दिया है. उन्होंने मुझे धन और पुत्रों से भी संपन्न किया. (४)
आ वामगन्त्सुमतिर्वाजिनीवसू न्यू श्विना हृत्सु कामा अरंसत.
अभूतं गोपा मिथुना शुभस्पती प्रिया अर्यम्णो दुर्या अशीमहि.. (५)
हे उषाकालीन ऐश्वर्य वाले अश्विनकुमारो! तुम्हारे हृदय में जो अभीष्ट है, वह तुम्हारी
कृपामयी बुद्धि के द्वारा हमें प्राप्त हो. तुम हमारे प्रिय तथा रक्षक बनो. हम सूर्य देव की कृपा
से घरों में सुख का भोग करने वाले हैं. (५)
सा मन्दसाना मनसा शिवेन रयिं धेहि सर्ववीरं वर्चस्यम्.
सुगं तीर्थं सुप्रापणं शुभस्पती स्थाणुं पथिष्ठामप दुर्मतिं हतम्.. (६)
तुम कल्याणकारी मन से वीरों से युक्त धन का पोषण करो. हे अश्विनी कुमारो! तुम इस
तीर्थ को सुफल करते हुए मार्ग में प्राप्त होने वाली दुर्गति आदि को दूर करो. (६)
या ओषधयो या नद्यो ३ यानि क्षेत्राणि या वना.
तास्त्वा वधु प्रजावतीं पत्ये रक्षन्तु रक्षसः.. (७)
हे वधू! ओषधि, नदी, श्वेत और वन तुझे संतान वाली बनाएं तथा दुष्टों से तेरे पति की
रक्षा करें. (७)
एमं पन्थामरुक्षाम सुगं स्वस्तिवाहनम्.
यस्मिन् वीरो न रिष्यत्यन्येषां विन्दते वसु.. (८)
हम उस मार्ग पर चलते हैं, जिस पर वाहन सुखपूर्वक चल सकते हैं. इस मार्ग पर वीरों
की हानि नहीं होती तथा अन्य जनों का धन प्राप्त होता है. (८)
इदं सु मे नरः शृणुत ययाशिषा दम्पती वाममश्नुतः.
ये गन्धर्वा अप्सरसश्च देवीरेषु वानस्पत्येषु ये ऽ धि तस्थुः.
स्योनास्ते अस्यै वध्वै भवन्तु मा हिंसिषुर्वरहतुमुह्यमानम्.. (९)
हे मनुष्यो! मेरी बात सुनो. वनस्पतियों में गंधर्व तथा अप्सराएं हैं. वे इसे सुख देने वाले
हैं. इस दहेज रूप धन को नष्ट न करें. इस आशीर्वादात्मक वाणी से ये दोनों उत्तम पदार्थों का
उपभोग करें. (९)
ये वध्व श्चन्द्रं वहतुं यक्ष्मा यन्ति जनाँ अनु.
पुनस्तान् यज्ञिया देवा नयन्तु यत आगताः.. (१०)
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