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सर्वकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 716, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 716

ब्रह्मणस्पते पतिमस्यै रोचय चारु संभलो वदतु वाचमेताम्.. (३१)
हे पति और पत्नी! तुम दोनों सत्य व्यवहारों के रहते हुए तथा सत्य भाषण करते हुए
समृद्धि वाला भाग्य प्राप्त करो. हे बृहस्पति! इस पत्नी के हृदय में पति के प्रति रुचि उत्पन्न
करो. पति इस के प्रति सुंदर वाणी बोले. (३१)
इहेदसाथ न परो गमाथेमं गावः प्रजया वर्धयाथ.
शुभं यतीरुसियाः सोमवर्चसो विश्वे देवाः क्रन्निह वो मनांसि.. (३२)
हे गायो! तुम यहां ही रहो. तुम यहां से दूर मत जाओ. तुम इसे उत्तम संतान के साथ
बढ़ाओ. हे गायो! तुम शुभ को प्राप्त कराने वाली तथा चंद्रमा की किरणों के समान प्रभा
वाली बनो. सभी देव तुम्हारे हृदयों को स्थिर बनाएं. (३२)
इमं गावः प्रजया सं विशाथायं देवानां न मिनाति भागम्.
अस्मै वः पूषा मरुतश्च सर्वे अस्मै वो धाता सविता सुवाति.. (३३)
हे गायो! तुम इस के घर में अपनी संतान के साथ प्रवेश करो. यह मनुष्य देवों के भाग
का लोप नहीं करता. विधाता और सविता तुम्हें दूसरे मनुष्य के लिए उत्पन्न करते हैं. (३३)
अनृक्षरा ऋजवः सन्तु पन्थानो येभिः सखायो यन्ति नो वरेयम्.
सं भगेन समर्येम्णा सं धाता सृजतु वर्चसा.. (३४)
हमारे वे सभी मार्ग कंटक रहित और सरल हैं, जिन से हमारे मित्र कन्या के घर तक
पहुंचते हैं. धाता, भग और अर्यमा देव इसे तेज से युक्त करें. (३४)
यच्च वर्चो अक्षेषु सुरायां च यदाहितम्.
यद् गोष्वश्विना वर्चस्तेनेमां वर्चसावतम्.. (३५)
हे अश्विनीकुमारो! जो तेज आंखों में होता है, जो संपत्ति में स्थान प्राप्त करता है तथा
जो तेज गायों में है, उसी तेज से इस की रक्षा करो. (३५)
येन महानघ्न्या जघनमश्विना येन वा सुरा.
येनाक्षा अभ्यषिच्यन्त तेनेमां वर्चसावतम्.. (३६)
हे अश्विनीकुमारो! जिस से बड़ी गौ का निचला दुग्धाशय का भाग, जिस से संपत्ति तथा
जिस से आंखें भरी रहती हैं, उस तेज से उस वधू की रक्षा करो. (३६)
यो अनिध्मो दीदयदप्स्व १ न्तर्यं विप्रास ईडते अध्वरेषु.
अपां नपान्मधुमतीरपो दा याभिरिन्द्रो वावृधे वीर्या वान्.. (३७)
जो जलों में बिना ईंधनों के चमकने वाला तेज है, जो यज्ञों के द्विजों का ज्ञान रूप तेज
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