अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 707, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंस वा अह्नो ऽ जायत तस्मादहरजायत.. (१)
उस से दिन प्रकट हुआ और वह दिन से प्रकट हुआ. (१)
स वै रात्र्या अजायत तस्माद् रात्रिरजायत.. (२)
रात्रि उन्हीं ब्रह्म से प्रकट हुई और वे रात्रि से उत्पन्न हुए. (२)
स वा अन्तरिक्षादजायत तस्मादन्तरिक्षमजायत.. (३)
अंतरिक्ष उन से प्रकट हुआ और वे अंतरिक्ष से प्रकट हुए. (३)
स वै वायोरजायत तस्माद् वायुरजायत.. (४)
वायु उन से प्रकट हुई और वे वायु से प्रकट हुए. (४)
स वै दिवो ऽ जायत तस्माद् द्यौरध्यजायत.. (५)
आकाश उन से प्रकट हुआ और वे आकाश से प्रकट हुए. (५)
स वै दिग्भ्यो ऽ जायत तस्माद् दिशो ऽ जायन्त.. (६)
दिशाएं उन से प्रकट हुईं और वे दिशाओं से प्रकट हुए. (६)
स वै भूमेरजायत तस्माद् भूमिरजायत.. (७)
पृथ्वी उन से प्रकट हुईं और वे पृथ्वी से प्रकट हुए. (७)
स वा अग्नेरजायत तस्मादग्निरजायत.. (८)
अग्नि उन से प्रकट हुई और वे अग्नि से प्रकट हुए. (८)
स वा अद्भयो ऽ जायत तस्मादापो ऽ जायन्त.. (९)
जल उन से प्रकट हुआ और वे जल से प्रकट हुए. (९)
स वा ऋग्भ्यो ऽ जायत तस्मादृचो ऽ जायन्त.. (१०)
ऋचाएं उन से प्रकट हुईं और वे ऋचाओं से प्रकट हुए. (१०)
स वै यज्ञादजायत तस्माद् यज्ञो ऽ जायत.. (११)
यज्ञ उन से प्रकट हुआ और वे यज्ञ से प्रकट हुए. (११)
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