अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 537, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंइन्द्रस्य भाग स्थ.
अपां शुक्रमापो देवीर्वर्चो अस्मासु धत्त.
प्रजापतेर्वो धाम्ना ऽस्मै लोकाय सादये.. (८)
हे दिव्य प्रवाह वाले जलो! तुम इंद्र के अंश हो. तेज जल का वीर्य है. तुम हम में तेज
स्थापित करो. तुम प्रजापति के निवास स्थान से पधारे हो. हम तुम्हें इस लोक में निश्चित
स्थान प्रदान करते हैं. (८)
सोमस्य भाग स्थ.
अपां शुक्रमापो देवीर्वर्चो अस्मासु धत्त.
प्रजापतेर्वो धाम्ना ऽस्मै लोकाय सादये.. (९)
हे जलो! तुम सोम के भाग हो, तुम जलों का वीर्य एवं दिव्य तेज हम में धारण करो.
लोक के कल्याण के लिए प्रजापति का तेज हम में स्थित हो. (९)
वरुणस्य भाग स्थ.
अपां शुक्रमापो देवीर्वर्चो अस्मासु धत्त.
प्रजापतेर्वो धाम्ना ऽस्मै लोकाय सादये.. (१०)
हे जलो! तुम वरुण के भाग हो. तुम जलों का वीर्य एवं दिव्य तेज हम में धारण करो.
तुम लोक के कल्याण के लिए प्रजापति का तेज हम में स्थित हो. (१०)
मित्रावरुणयोर्भाग स्थ.
अपां शुक्रमापो देवीर्वर्चो अस्मासु धत्त.
प्रजापतेर्वो धाम्ना ऽस्मै लोकाय सादये.. (११)
हे जलो! तुम मित्र और वरुण के भाग हो. तुम जलों का वीर्य और दिव्य तेज हमें में
धारण करो. तुम लोक के कल्याण के लिए प्रजापति का तेज हम में स्थित करो. (११)
यमस्य भाग स्थ.
अपां शुक्रमापो देवीर्वर्चो अस्मासु धत्त.
प्रजापतेर्वो धाम्ना ऽस्मै लोकाय सादये.. (१२)
हे जलो! तुम यम के भाग हो. तुम जलों का वीर्य और दिव्य तेज हम में धारण करो. तुम
लोक कल्याण के लिए प्रजापति का तेज हम में स्थित करो. (१२)
पितॄणां भाग स्थ.
अपां शुक्रमापो देवीर्वर्चो अस्मासु धत्त.
प्रजापतेर्वो धाम्ना ऽस्मै लोकाय सादये.. (१३)
ebook converter DEMO Watermarks*