अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 5, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंसकता है—
(१) अध्यात्म
(२) अधिभूत और
(३) अधिदैवत.
उन के अनुसार अथर्ववेद के सूक्तों का विषयगत विभाजन निम्नलिखित है—
(१) भैषज्य सूक्त—इन सूक्तों में रोगों की चिकित्सा और ओषधियों का वर्णन है.
(२) आयुष्य सूक्त—इन सूक्तों में दीर्घ आयु के लिए प्रार्थना की गई है.
(३) पौष्टिक सूक्त—इन सूक्तों में घर बनाने, हल जोतने, बीज बोने, अनाज
उत्पन्न करने आदि का वर्णन है.
(४) प्रायश्चित सूक्त—इन सूक्तों में अनेक प्रकार के पाप और निषिद्ध कर्मों के
प्रायश्चित का वर्णन है.
(५) स्त्रीकर्म सूक्त—ये सूक्त विवाह तथा प्रेम से संबंधित हैं.
(६) राजकर्म सूक्त—इन सूक्तों का संबंध राजाओं और उन के कार्यों से है.
अथर्ववेद का विशेष सूक्त
अथर्ववेद का विशेष सूक्त ‘पृथ्वी सूक्त’ है. इस सूक्त में पृथ्वी को ‘माता’ कहा गया है.
इस के एक मंत्र का अंश है—
माता पृथिवी पुत्रो ऽ हं पृथिव्याः.
अर्थात पृथ्वी मेरी माता है और मैं इस पृथ्वी का पुत्र हूं.
यह भावना शेष तीनों वेदों में से किसी में नहीं है.
जहां तक संभव हुआ है, मैं ने सरल भाषा में अथर्ववेद के मंत्रों का आचार्य सायण के
भाष्य के आधार पर अनुवाद किया है.
—गंगा सहाय शर्मा