अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 45, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंतेना ते तन्वे ३ शं करं पृथिव्यां ते निषेचनं बहिष्टे अस्तु बालिति.. (३)
हम सैकड़ों सामर्थ्यों से संपन्न एवं बाण के पिता वरुण को जानते हैं. हे रोगी मनुष्य!
इसी बाण से मैं तेरे मूत्रादि रोगों को दूर करता हूं. तेरे पेट में रुका हुआ मूत्र बाहर निकल कर
धरती पर गिरे. (३)
विद्मा शरस्य पितरं चन्द्रं शतवृष्ण्यम्.
तेना ते तन्वे ३ शं करं पृथिव्यां ते निषेचनं बहिष्टे अस्तु बालिति.. (४)
हम सैकड़ों शक्तियों वाले एवं बाण के पिता चंद्र को जानते हैं. हे रोगी मनुष्य! मैं उसी
बाण से तेरे मूत्रादि रोगों को समाप्त करता हूं. तेरे पेट में रुका हुआ मूत्र बाहर निकले और
धरती पर गिरे. (४)
विद्मा शरस्य पितरं सूर्य शतवृष्ण्यम्.
तेना ते तन्वे ३ शं करं पृथिव्यां ते निषेचनं बहिष्टे अस्तु बालिति.. (५)
हम सैकड़ों शक्तियों वाले एवं बाण के पिता सूर्य को जानते हैं. हे रोगी! मैं इसी बाण से
तेरे मूत्रादि रोगों को नष्ट करता हूं. उदर (पेट) में संचित तेरा मूत्र बाहर निकल कर धरती पर
गिरे. (५)
यदान्त्रेषु गवीन्योर्यद्वस्तावधि संश्रितम्.
एवा ते मूत्रं मुच्यतां बहिर्बालिति सर्वकम्.. (६)
जो मूत्र तेरी आंतों में, मूत्रनाड़ी में एवं मूत्राशय में रुका हुआ है, वह तेरा सारा मूत्र शब्द
करता हुआ शीघ्र बाहर निकल आए. (६)
प्र ते भिनद्मि मेहनं वर्त्रं वेशन्त्या इव.
एवा ते मूत्रं मुच्यतां बहिर्बालिति सर्वकम्.. (७)
हे मूत्र व्याधि से पीड़ित रोगी! मैं तेरे मूत्र निकलने के मार्ग का उसी प्रकार भेदन करता
हूं, जिस प्रकार जलाशय का जल बाहर निकालने के लिए नाली खोदते हैं. तेरा सारा मूत्र
शब्द करता हुआ बाहर निकले. (७)
विषितं ते वस्तिबिलं समुद्रस्योदधेरिव.
एवा ते मूत्रं मुच्यतां बहिर्बालिति सर्वकम्.. (८)
हे मूत्र रोग से दुःखी रोगी! जिस प्रकार सागर, जलाशय आदि का जल निकलने के
लिए मार्ग बना दिया जाता है, उसी प्रकार मैं ने तेरे रुके हुए मूत्र को बाहर निकालने के लिए
तेरे मूत्राशय का द्वार खोल दिया है. तेरा सारा मूत्र शब्द करता हुआ बाहर निकले. (८)
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