अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 423, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रकार तू हिंसा रहित बने, उसे जंभ असुर न जाने. अदिति पुत्र देव तुझे मृत्यु से छुड़ाएं. आठ
वसु इंद्र और अग्नि कल्याण के लिए तेरा उद्धार करें. (१६)
उत् त्वा द्यौरुत् पृथिव्युत् प्रजापतिरग्रभीत्.
उत् त्वा मृत्योरोषधयः सोमराज्ञीरपीपरन्.. (१७)
द्यौ देवता एवं पृथ्वी तेरा भरणपोषण करें. सभी देवों के पिता प्रजापति ने तेरा उद्धार
किया था. सोम की पत्नियों और जड़ीबूटियों ने मृत्यु से तुझे छुड़ाया था. (१७)
अयं देवा इहैवास्त्वयं मा ऽ मुत्र गादितः.
इमं सहस्रवीर्येण मृत्योरुत् पारयामसि.. (१८)
हे आदित्य आदि देवो! यह पुरुष यहीं भूलोक में रहे. यह पुरुष इस भूलोक से स्वर्ग में न
जाए. हम रक्षा करने वाले तुझ पुरुष को असीमित शक्ति के रक्षा विधान द्वारा मृत्यु से छीनते
हैं. (१८)
उत् त्वा मृत्योरपीपरं सं धमन्तु वयोधसः.
मा त्वा व्यस्तकेश्यो ३ मा त्वा ऽ घरुदो रुदन्.. (१९)
हे आयु की कामना करने वाले पुरुष! अन्न के देव धाता तुझे मृत्यु से बचाएं एवं तेरा
उद्धार करें. बिखरे हुए केशों वाले बांधव एवं नारियां तेरी मृत्यु पर न रोएं. तेरे संबंधी दुःख के
कारण न रोएं. (१९)
आहार्षमविदं त्वा पुनरागाः पुनर्णवः.
सर्वाङ्ग सर्वं ते चक्षुः सर्वमायुश्च ते ऽ विदम्... (२०)
हे मृत्यु के द्वारा पकड़े हुए पुरुष! मैं ने तुझे मृत्यु से छीन लिया है और इस प्रकार तुझे
प्राप्त किया है. हे पुनः जन्म लेने वाले! तू संसार में दोबारा आया है. हे संपूर्ण अंगों वाले! तेरी
चक्षु आदि इंद्रियां अपनेअपने विषय का प्रकाशन करने वाली हों. मैं ने तेरी सौ वर्ष की आयु
प्राप्त कर ली है. (२०)
व्यवात् ते ज्योतिरभूदप त्वत् तमो अक्रमीत्.
अप त्वन्मृत्युं निर्ऋतिमप यक्ष्मं नि दध्मसि.. (२१)
हे अचेतन पुरुष! तेरी अचेतना निकल गई है. तुझे जीवनरूपी प्रकाश प्राप्त हो गया है.
मैं ने तुझ से मृत्यु की देवता निर्ऋति को दूर कर दिया है. मैं तेरे बाहरी और आंतरिक रोगों का
भी विनाश करता हूं. (२१)
सूक्त-२ देवता—आयु
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