अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 414, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंवैश्वानरेण सयुजा सजोषास्तान् प्रतीचो निर्दह जातवेदः.. (२)
हे अग्नि! जो शत्रु हमें सोते हुए मारना चाहता है, जो हमें जागते हुए मारना चाहता है,
जो शत्रु हमें बैठे हुए मारना चाहता है तथा जो शत्रु हमें चलते हुए मारना चाहता है, हे अग्नि!
तुम जठराग्नि से मिल कर और समान प्रीति वाले बन कर हमें मारने के लिए सामने आते हुए
शत्रुओं को जलाओ. (२)
सूक्त-११४ देवता—अग्नि
इदमुग्राय बभ्रवे नमो यो अक्षेषु तनूवशी.
घृतेन कलिं शिक्षामि स नो मृडातीदृशे.. (१)
अधिक बलशाली एवं मटमैले रंग वाले उस देव को नमस्कार है जो जुए में विजय प्राप्त
कराता है. वह जुए में पासों से इच्छानुसार विजय दिलाने वाला है. मंत्र युक्त घृत के द्वारा मैं
कलि अर्थात पराजय देने वाले पांच अंकों को नष्ट करता हूं. नमस्कार से प्रसन्न जुए का देव
इस प्रकार के जय लक्षण फल के द्वारा हमें सुखी करें. (१)
घृतमप्सराभ्यो वह त्वमग्ने पांसूनक्षेभ्यः सिकता उपश्व.
यथाभागं हव्यदातिं जुषाणा मदन्ति देवा उभयानि हव्या.. (२)
हे अग्नि! तुम हमारी विजय के लिए अंतरिक्ष में घूमने वाली अप्सराओं को आज्य
अर्थात् घृत पहुंचाओ तथा हमारे विरोधी जुआरियों के लिए सूक्ष्म धूल के कण, शकर और
जल पहुंचाओ, जिस से वे पराजित हों. अपनेअपने भाग के अनुसार हवि प्राप्त करते हुए देव
दो प्रकार के हवि से अर्थात् सोम और घृत से तृप्त होते हैं. (२)
अप्सरसः सधमादं मदन्ति हविर्धानमन्तरा सूर्यं च.
ता मे हस्तौ सं सृजन्तु घृतेन सपत्नं मे कितवं रन्धयन्तु.. (३)
जुए की देवियां अप्सराएं भूलोक और अंतरिक्षलोक में एक साथ प्रसन्न होती हैं. वे
अप्सराएं मेरे दोनों हाथों को जय लक्षण फल से संयुक्त करें तथा मेरे विरोधी जुआरी को मेरे
वश में करें. (३)
आदिनवं प्रतिदीव्ने घृतेनास्माँ अभि क्षर.
वृक्षमिवाशन्या जहि यो अस्मान् प्रतिदीव्यति.. (४)
मैं अपने विरोधी जुआरी को जीतने के लिए पासों के द्वारा जुआ खेलता हूं. हे जुए से
संबंधित देवियो! मुझे सारपूर्ण विजय से युक्त कराओ. जो जुआरी मुझे जीतने के लिए मेरे
विरोध में जुआ खेलता है, उस का उसी प्रकार विनाश करो, जिस प्रकार बिजली सूखे वृक्ष
का विनाश कर देती है. (४)
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