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सर्वकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 367, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 367

सूक्त-१५ देवता—सविता
अभि त्यं देवं सवितारमोण्योः कविक्रतुम्.
अर्चामि सत्यसवं रत्नधामभि प्रियं मतिम्.. (१)
धरती और आकाश का निर्माण करने वाले सविता देव की मैं स्तुति करता हूं. ये सविता
देव कमनीय कर्म करने वाले, यथार्थ के प्रेरक, रत्नों को धारण करने वाले एवं सब का प्रिय
करने वाले हैं, इसलिए सब के माननीय हैं. (१)
ऊर्ध्वा यस्यामतिर्भा अदिद्युतत् सवीमनि.
हिरण्यपाणिरमिमीत सुक्रतुः कृपात् स्वः.. (२)
जिन सविता देव की व्याप्त करने वाली दीप्ति उत्कृष्ट है तथा सारे जगत् को प्रकाशित
करती है उन की आज्ञा होने पर शोभन कर्म वाले ब्रह्मा हाथ में सोना ले कर कल्पना के द्वारा
सुख देने वाले सोम का निर्माण करते हैं. (२)
सावीर्हि देव प्रथमाय पित्र वर्ष्माणमस्मै वरिमणमस्मै.
अथास्मभ्यं सवितर्वार्याणि दिवोदिव आ सुवा भूरि पश्वः.. (३)
हे सविता देव! इस प्रमुख एवं पुष्टि की कामना करने वाले यजमान को पुत्र, पौत्र आदि
संतान की प्रेरणा दो. इस पुष्टि चाहने वाले यजमान को उत्तमता प्रदान करो. हे सविता देव!
इस के पश्चात् हमारे लिए प्रतिदिन वरण करने योग्य फल एवं अधिक मात्रा में पशु प्रदान
करो. (३)
दमूना देवः सविता वरेण्यो दधद् रत्नं दक्षं पितृभ्य आयूंषि.
पिबात् सोमं ममददेनमिष्टे परिज्मा चित् क्रमते अस्य धर्मणि.. (४)
दान देने की इच्छा रखने वाले, श्रेष्ठ एवं सब के प्रेरक सविता देव धन एवं बल प्रदान
करते हुए तथा पूर्वजों के पास से सौ वर्ष की आयु देते हुए निचोड़े गए सोम का पान करें.
पिया हुआ यह सोम सविता देव से संबंधित याग में सविता देव को प्रसन्न करे. सभी ओर
व्याप्त होने वाला वह सोम सविता देव के पेट में निवास करे. (४)
सूक्त-१६ देवता—सविता
तां सवितः सत्यसवां सुचित्रामाहं वृणे सुमतिं विश्ववाराम्.
यामस्य कण्वो अदुहत् प्रपीनां सहस्रधारां महिषो भगाय.. (१)
हे सब के प्रेरक सविता देव! मैं सत्य से अनुमत, इच्छा करने योग्य एवं सब के द्वारा
वरण करने योग्य तुम्हारी कृपा दृष्टि की याचना करता हूं. सविता देव की उस कृपा दृष्टि को