अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 353, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंजल के स्वामी वरुण की धारण शक्ति से संतप्त करता हूं. (२)
यमिन्द्राणी स्मरमसिञ्चदप्स्व १ न्तः शोशुचानं सहाध्या.
तं ते तपामि वरुणस्य धर्मणा.. (३)
इंद्र पत्नी ने कामदेव को उस की पत्नी आधि अर्थात् चिंता के साथ जल में डुबो दिया,
क्योंकि वह उस के वियोग में संतप्त था. हे नारी! मैं तेरे लिए उस कामदेव को जल के स्वामी
वरुण की धारण शक्ति से संतप्त करता हूं. (३)
यमिन्द्राग्नी स्मरमसिञ्चतामप्स्व १ न्तः शोशुचानं सहाध्या.
तं ते तपामि वरुणस्य धर्मणा.. (४)
इंद्र और अग्नि देवों ने कामदेव को उस की पत्नी आधि अर्थात् चिंता के साथ जल में
डुबो दिया, क्योंकि वह उस के वियोग में संतप्त था. हे नारी! मैं तेरे लिए उस कामदेव को
जल के स्वामी वरुण की धारण शक्ति से संतप्त करता हूं. (४)
यं मित्रावरुणौ स्मरमसिञ्चतामप्स्व १ न्तः शोशुचानं सहाध्या.
तं ते तपामि वरुणस्य धर्मणा.. (५)
मित्र और वरुण देवों ने कामदेव को उस की पत्नी आधि अर्थात् चिंता के साथ जल में
डुबो दिया, क्योंकि वह उस के वियोग में संतप्त था. हे नारी! मैं तेरे लिए उस कामदेव को
जल के स्वामी वरुण की धारण शक्ति से संतप्त करता हूं. (५)
सूक्त-१३३ देवता—मेखला
य इमां देवो मेखलामाबाबन्ध यः संननाह य उ नो युयोज.
यस्य देवस्य प्रशिषा चरामः स पारमिच्छात् स उ नो वि मुञ्चात्.. (१)
शत्रुओं को मारने में कुशल देव ने अपने शत्रु को मारने के लिए यह मेखला बांधी है, जो
इस समय भी दूसरों की मेखला को बांधता है, जिस ने मेखला के द्वारा हमें अभिचार कर्म में
लगाया है तथा जिस देव की आज्ञा से हम चलतेफिरते हैं, वह हमारे द्वारा प्रारंभ किए गए
अभिचार की समाप्ति की इच्छा करे. वही हमें शत्रुओं से छुड़ाए. (१)
आहुतास्यभिहुत ऋषीणामस्यायुधम्.
पूर्वा व्रतस्य प्राश्नती वीरघ्नी भव मेखले.. (२)
हे मेखला! तुम आहुतियों के द्वारा संस्कार की गई तथा बंधन हेतु बुलाई गई हो, जिस
से वे शत्रुओं का बंधन करते थे. तुम प्रारंभ किए गए कर्म से पहले होने वाली तथा शत्रुओं के
वीरों का विनाश करने वाली हो. (२)
ebook converter DEMO Watermarks*