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सर्वकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 257, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 257

द्यावा और पृथ्‍वी दाताओं के अधिपति हैं. वे इसे वेदोक्‍त, पौरोहित्य कर्म में, प्रतिष्‍ठा में,
संकल्‍प, देवाह्वान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी रक्षा करें. (३)
वरुणो ऽ पामधिपतिः स मावतु.
अस्मिन् ब्रह्म‍ण्यस्मिन् कर्मण्यस्यां पुरोधायामस्यां प्रतिष्ठायामस्यां
चित्त्यामस्यामाकृत्यामस्यामाशिष्यस्यां देवहूत्यां स्वाहा.. (४)
वरुण जलों के अधिपति हैं. वह इस वेदोक्‍त पौरोहित्य कर्म में, प्रतिष्ठा में, संकल्प में,
देवाह्वान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी रक्षा करें. (४)
मित्रावरुणौ वृष्ट्याधिपती तौ मावताम्.
अस्मिन् ब्रह्म‍ण्यस्मिन् कर्मण्यस्यां पुरोधायामस्यां प्रतिष्ठायामस्यां
चित्त्यामस्यामाकृत्यामस्यामाशिष्यस्यां देवहूत्यां स्वाहा.. (५)
मित्र और वरुण वर्षा के अधिपति हैं. वे इस वेदोक्‍त पौरोहित्य कर्म में, प्रतिष्ठा में,
संकल्प में, देवाह्वान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी रक्षा करें. (५)
मरुतः पर्वतानामधिपतयस्ते मावन्तु.
अस्मिन् ब्रह्म‍ण्यस्मिन् कर्मण्यस्यां पुरोधायामस्यां प्रतिष्ठायामस्यां
चित्त्यामस्यामाकृत्यामस्यामाशिष्यस्यां देवहूत्यां स्वाहा.. (६)
मरुद्गण पर्वतों के अधिपति हैं. वे इस वेदोक्त पौरोहित्य कर्म में, प्रतिष्ठा में, संकल्प में,
देवाह्वान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी रक्षा करें. (६)
सोमो वीरुधामधिपतिः स मावतु.
अस्मिन् ब्रह्म‍ण्यस्मिन् कर्मण्यस्यां पुरोधायामस्यां प्रतिष्ठायामस्यां
चित्त्यामस्यामाकृत्यामस्यामाशिष्यस्यां देवहूत्यां स्वाहा.. (७)
सोम लताओं के स्वामी हैं, वह इस वेदोक्त पौरोहित्य कर्म में, प्रतिष्ठा में, संकल्प में,
देवाह्वान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी रक्षा करें. (७)
वायुरन्तरिक्षस्याधिपतिः स मावतु.
अस्मिन् ब्रह्म‍ण्यस्मिन् कर्मण्यस्यां पुरोधायामस्यां प्रतिष्ठायामस्यां
चित्त्यामस्यामाकृत्यामस्यामाशिष्यस्यां देवहूत्यां स्वाहा.. (८)
वायु देव अंतरिक्ष के अधिपति हैं. वे इस वेदोक्त पौरोहित्य कर्म में, प्रतिष्ठा में, संकल्प
में, देवाह्वान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी रक्षा करें. (८)
सूर्यश्चक्षुषामधिपतिः स मावतु.
अस्मिन् ब्रह्म‍ण्यस्मिन् कर्मण्यस्यां पुरोधायामस्यां प्रतिष्ठायामस्यां
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