अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें७. अदिति की स्तुति १-२
८. अदिति के पुत्रों अर्थात देवों का वर्णन १
९. बृहस्पति की स्तुति १
१०. सब के पोषक सूर्य देव की स्तुति १-४
११. सरस्वती की स्तुति १
१२. पर्जन्य देव की स्तुति १
१३. प्रजापति की दोनों पुत्रियों,
सभा तथा सभासदों की स्तुति १-४
१४. द्वेष करने वाले पुरुषों के तेज का विनाश १-२
१५. सविता देव की स्तुति १-४
१६. सब के प्रेरक सविता देव की स्तुति १
१७. बृहस्पति एवं सविता देव की स्तुति १
१८. धाता देव की स्तुति १-४
सविता व प्रजापति की स्तुति ४
१९. धाता की प्रशंसा १-२
२०. प्रजापति और धाता की स्तुति १
२१. अनुमति नामक देवी की प्रशंसा १-६
सुख प्राप्त करने का अनुग्रह ३
सुप्रणीति देवी से यज्ञ पूर्ण करने का आग्रह ४
२२. पुरातन सूर्य की प्रशंसा १
२३. सत्कर्म की प्रेरणा देने के लिए सूर्य देव की स्तुति १-२
२४. दुःस्वप्न विनाश की कामना १
२५. सविता व प्रजापति देव की आराधना १
२६. विष्णु और वरुण की प्रशंसा १-२
२७. विष्णु के वीरतापूर्ण कर्मों का वर्णन १-८
२८. इडा की स्तुति १
२९. काम में आने वाले उपकरणों की प्रशंसा १
३०. अग्नि और विष्णु की स्तुति १-२
३१. देवों से यज्ञ के यूपों को रंगने की कामना १
३२. धनवान एवं शौर्य संपन्न इंद्र की प्रशंसा १
३३. अग्नि देव की स्तुति १
३४. मरुत् आदि देवगणों से सुखसमृद्धि की कामना १
३५. अग्नि देव व अदीना देवमाता की प्रशंसा १
३६. अग्नि से शत्रुओं के विनाश की कामना १-३
विद्वेष करने वाली स्त्री २
संतान रहित नारी ३
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