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सर्वकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 175, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 175

प्रेरित मेघ पृथ्वी पर वर्षा करें. (८)
आपो विद्युदभ्रं वर्षं सं वो ऽ वन्तु सुदानव उत्सा अजगरा उत.
मरुद्भिः प्रच्युता मेघाः प्रावन्तु पृथिवीमनु.. (९)
हे शोभन दान वाले मरुतो! तुम से संबंधित मेघों का जल, बिजली, जल से भरे हुए मेघ
तथा अजगर के समान मोटी जल धाराएं पृथ्वी पर प्रवाहित हों. (९)
अपामग्निस्तनूभिः संविदानो य ओषधीनामधिपा बभूव.
स नो वर्षं वनुतां जातवेदाः प्राणं प्रजाभ्यो अमृतं दिवस्परि.. (१०)
बादलों में स्थित जलों के शरीर से मिली हुई बिजली रूपी अग्नि पैदा होने वाली
जड़ीबूटियों की स्वामिनी है. उत्पन्न होने वाले प्राणियों के ज्ञाता अग्नि देव प्रजाओं को जीवन
देने वाली तथा स्वर्ग का अमृत प्राप्त कराने वाली वर्षा हमें प्रदान करें. (१०)
प्रजापतिः सलिलादा समुद्रादाप ईरयन्नुदधिमर्दयाति.
प्र प्यायतां वृष्णो अश्वस्य रेतो ऽ वर्डैतेन स्तनयित्नुनेहि.. (११)
प्रजाओं के पालक सूर्य व्यापक सागर से जलों को वर्षा के निमित्त प्रेरित करते हुए
पीड़ित करें. व्यापक एवं घोड़े के समान वेग वाले मेघ का वर्षा जल रूपी वीर्य वृद्धि को प्राप्त
हो. हे पर्जन्य! तुम इस शक्तिशाली मेघ के द्वारा हमारे सामने आओ. (११)
अपो निष्षिञ्चन्नसुरः पिता नः श्वसन्तु गर्गरा अपां वरुणाव नीचीरपः सृज.
वदन्तु पृश्निबाहवो मण्डूका इरिणानु.. (१२)
मेघों के जन्मदाता एवं वर्षा के जल के द्वारा सब के रक्षक सूर्य हमारे पिता हैं. वे वर्षा
के जलों को नीचे गिराएं. इस के पश्चात गड़गड़ शब्द करती हुई जल धाराएं बहें. हे वरुण!
तुम भी पृथ्वी को सींचने वाले जल मेघों से नीचे गिराओ. श्वेत भुजाओं वाले मेढक तृण रहित
भूमि पर चेतना प्राप्त कर के शब्द करें. (१२)
संवत्सरं शशयाना ब्राह्मणा व्रतचारिणः.
वाचं पर्जन्यजिन्वितां प्र मण्डूका अवादिषुः.. (१३)
एक वर्ष तक सोए रहने वाले मेढक वर्ष के अंत में वर्षा के जल से जागृत हो कर
व्रतचारी ब्राह्मणों के समान पर्जन्य को प्रसन्न करने वाली वाणी बोलते हैं. (१३)
उपप्रवद मण्डूकि वर्षमा वद तादुरि.
मध्ये हृदस्य प्लवस्व विगृह्य चतुरः पदः.. (१४)
हे मेढकी! तू प्रसन्नता को प्राप्त कर के टर्रटर्र शब्द कर. हे दर्दुरी! तू ऐसा शब्द कर कि