अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1025, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे वीर इंद्र! तुम प्रत्येक युद्ध में धनों को जीतते हो. जो ब्राह्मण तुम्हारी स्तुति करें, उन्हें
तुम शक्तिशाली बनाओ. जो पुरुष दूसरों के सुख के अवसर पर दुःख देते हैं, वे तुम्हें प्राप्त न
हों. (७)
त्वया वयं शाशद्महे रणेषु प्रपश्यन्तो युधेन्यानि भूरि.
चोदयामि त आयुधा वचोभिः सं ते शिशामि ब्रह्मणा वयांसि.. (८)
हे इंद्र! रणभूमि में हम तुम्हारे द्वारा ही अपने विरोधियों की हिंसा करते हैं. मैं अपने तप
के द्वारा सिद्धि प्राप्त वचनों से तुम्हारे आयुधों को प्रेरित करता हूं तथा पक्षियों के समान वेग
वाले तुम्हारे बाणों को तीक्ष्ण बनाता हूं. (८)
नि तद् दधिषे ऽ वरे परे च यस्मिन्नाविथावसा दुरोणे.
आ स्थापयत मातरं जिगत्नुमत इन्वत कर्वराणि भूरि.. (९)
हे इंद्र! जिस घर में अन्न के द्वारा मेरा पालन हुआ है, जिन श्रेष्ठ प्राणियों ने मुझे धारण
किया है, उस घर में माता के द्वारा शक्ति की स्थापना हो. इस के बाद तुम उस घर में शोभन
पदार्थों को लाओ. (९)
स्तुष्व वर्ष्मन् पुरुवर्त्मानं समृभ्वाणमिनतममाप्तमाप्त्यानाम्.
आ दर्शति शवसा भूर्योजाः प्र सक्षति प्रतिमानं पृथिव्याः.. (१०)
हे स्तोता! परम तेजस्वी, विचरण करने वाले एवं श्रेष्ठ स्वामी इंद्र की स्तुति करो. पृथ्वी
रूपी वे इंद्र इस यज्ञशाला में व्याप्त हो रहे हैं. (१०)
इमा ब्रह्म बृहद्दिवः कृणवदिन्द्राय शूषमग्रियः स्वर्षाः.
महो गोत्रस्य क्षयन्ति स्वराजा तुरश्चिद् विश्वमर्णवत् तपस्वान्.. (११)
यह राजा स्वर्ग के स्वामी इंद्र के निमित्त स्तोत्रों की रचना करता हुआ स्वर्ग प्राप्ति की
कामना करता है. इंद्र जल की वर्षा करते हुए संसार को जल से पूर्ण करते हैं. (११)
एवा महान् बृहद्दिवो अथर्वावोचत् स्वां तन्व १ मिन्द्रमेव.
स्वसारौ मातरिभ्वरी अरिप्रे हिन्वन्ति चैने शवसा वर्धयन्ति च.. (१२)
महर्षि अथर्वा ने अपनेआप को इंद्र मानते हुए कहा कि पाप रहित मातर और इभ्वरी
दोनों बहनें इसे प्रसन्न करती हुई बल की वृद्धि करती हैं. (१२)
चित्रं देवानां केतुरनीकं ज्योतिषमान् प्रदिशः सूर्य उद्यन्.
दिवाकरो ऽ ति घुम्नैस्तमांसि विश्वातारीद् दुरितानि शुक्रः.. (१३)
ये किरणों वाले इंद्र सभी दिशाओं की ओर फैलाने वाले अपने प्रकाश से दिवस को