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अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

Ashtadhyayi Sutrapatha of Maharshi Panini

महर्षि पाणिनि द्वारा

DevanagariSanskritpublished102 पृष्ठ

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पृष्ठ 79

सप्तमाध्याये चतुर्थः पादः ७९
२७ रीङ् ऋतः। | ५१ रि च।
२८ रिङ् शयग्‌लिङ्क्षु। | ५२ ह एति।
२९ गुणोऽर्तिसंयोगाद्योः। | ५३ यीवर्णयोर्दीधीवेव्योः।
३० यङि च। | ५४ सनि मीमाघुरभलभशक-
३१ ई घ्राध्मोः। | पतपदामच इस्।
३२ अस्य च्वौ। | ५५ आप्ज्ञप्यृधामीत्।
३३ क्यचि च। | ५६ दम्भ इच्च।
३४ अशनायोदन्यधनाया | ५७ मुचोऽकर्मकस्य गुणो वा।
बुभुक्षापिपासागर्धेषु। | ५८ अत्र लोपोऽभ्यासस्य।
३५ नच्छन्दस्यपुत्रस्य। | ५९ ह्रस्वः।
३६ दुरस्यूर्द्रविणस्यूर्वृषण्यति | ६० हलादिः शेषः।
रिषण्यति। | ६१ शर्पूर्वाः खयः।
३७ अश्वाघस्यात्। | ६२ कुहोश्चुः।
३८ देवसुम्नयोर्यजुषि काठके। | ६३ न कवतेर्यङि।
३९ कव्यध्वरपृतनस्यर्चि लोपः। | ६४ कृषेश्छन्दसि।
४० द्यतिस्यतिमास्थामिति | ६५ दधर्तिदर्धर्तिदर्धर्षिबोभूतु-
किति। | तेतिक्तेऽलर्ष्यापनीफणत्-
४१ शाच्छोरन्यतरस्याम्। | संसनिष्यदत्करिक्रत्कनिक्रदद्-
४२ दधातेर्हिः। | भरिभ्रदद्विदध्वतोदविद्युतत्-
४३ जहातेश्च क्त्वि। | तरित्रतःसरीसृपतंवरीवृजन्-
४४ विभाषा छन्दसि। | मर्मृज्यागनीगन्तीति च।
४५ सुधितवसुधितनेमधितधिष्व- | ६६ उरत्।
धिषीय च। | ६७ द्युतिस्वाप्योः सम्प्रसारणम्।
४६ दो दद् घोः। | ६८ व्यथो लिटि।
४७ अच उपसर्गात्तः। | ६९ दीर्घ इणः किति।
४८ अपो भि। | ७० अत आदेः।
४९ सः स्यार्धधातुके। | ७१ तस्मान्नुड् द्विहलः।
५० तासस्त्योर्लोपः। |