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अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

Ashtadhyayi Sutrapatha of Maharshi Panini

महर्षि पाणिनि द्वारा

DevanagariSanskritpublished102 पृष्ठ

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पृष्ठ 24

२४ अष्टाध्यायीसूत्रपाठः ( यतिबोधसहितः )
४० हस्तादाने चेरस्तेये। | ६६ नित्यं पणः परिमाणे।
४१ निवासचितिशरीरोप- | ६७ मदोऽनुपसर्गे।
समाधानेष्वादेश्च कः। | ६८ प्रमदसम्मद्यौ हर्षे।
४२ सङ्घे चानोत्तराधर्ये। | ६९ समुदोरजः पशुषु।
४३ कर्मव्यतिहारे णच्स्त्रियाम्। | ७० अक्षेषु ग्लहः।
४४ अभिविधौ भाव इनुण्। | ७१ प्रजने सर्तेः।
४५ आक्रोशेड्वन्योर्ग्रहः। | ७२ ह्वः सम्प्रसारणं च
४६ प्रे लिप्सायाम्। | न्यभ्युपविषु।
४७ परौ यज्ञे। | ७३ आङि युद्धे।
४८ नौ वृ धान्ये। | ७४ निपानमाहावः।
४९ उदि श्रयतियौतिपूद्रुवः। | ७५ भावेऽनुपसर्गस्य।
५० विभाषाङि रुप्लुवोः। | ७६ हनश्च वधः।
५१ अवे ग्रहो वर्षप्रतिबन्धे। | ७७ मूर्तौ घनः।
५२ प्रे वणिजाम्। | ७८ अन्तर्घनो देशे।
५३ रश्मौ च। | ७९ अगारैकदेशे प्रघणः प्रघाणश्च।
५४ वृणोतेराच्छादने। | ८० उद्घनोऽत्याधानम्।
५५ परौ भुवोऽवज्ञाने। | ८१ अपघनोऽङ्गम्।
५६ एरच्। | ८२ करणेऽयोविद्रुषु।
५७ ऋदोरप्। | ८३ स्तम्बे क च।
५८ ग्रहवृदृनिश्चिगमश्च। | ८४ परौ घः।
५९ उपसर्गेऽदः। | ८५ उपघ्न आश्रये।
६० नौ ण च। | ८६ सङ्घोद्घौ गणप्रशंसयोः।
६१ व्यधजपोरनुपसर्गे। | ८७ निघो निमित्तम्।
६२ स्वनहसोर्वा। | ८८ द्वितः क्त्रिः।
६३ यमः समुपनिविषु च। | ८९ ट्वितोऽथुच्।
६४ नौ गदनदपठस्वनः। | ९० यजयाचयतविच्छप्रच्छरक्षो
६५ क्वणो वीणायां च। | नङ्।