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अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

पृष्ठ 680, कुल 805 में से

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३४ शातातपस्मृतिः ॥

अश्वशूकरशृङ्ग्यद्रि द्रुमादिशकटेनच ।
भृग्वग्निदारुशस्त्राश्मविषोद्बन्धनजैर्मृताः ॥ १ ॥
व्याघ्रादिगजभूपालचोरवैरिदृकाहताः ।
काष्ठशल्यमृतायेच शौचसंस्कारवर्जिताः ॥ २ ॥
विसूचिकागलकवलदवातीसारतोमृताः ।
डाकिन्यादिग्रहैर्ग्रस्ता विद्युत्पातहताश्चये ॥ ३ ॥
अस्पृश्याअपवित्राश्च पतिताःपुत्रवर्जिताः ।
पञ्चत्रिंशत्प्रकारैश्च नाप्नुवन्तिगतिंमृताः ॥ ४ ॥
पित्राद्याःपिण्डभाजःस्युस्त्रयोलेपभुजस्तथा ।
ततोनान्दीमुखाःप्रोक्तास्त्रयोप्यश्रुमुखास्त्रयः ॥ ५ ॥
द्वादशैतेपितृगणास्तर्पिताःसन्ततिप्रदाः ।
गतिहीनाःसुतादीनां सन्ततिंनाशयन्तिते ॥ ६ ॥
दशव्याघ्रादिनिहता गर्भान्निघ्नन्त्यमीक्रमात् ।


घोड़ा, सुवर, सींगों वाले पशुओं ने मारे, पर्वत तथा वृक्षादि से गिरके, गाड़ी से पिचल के मरे, पर्वत की शिला, अग्नि, लकड़ी, शस्त्र, पत्थर, विष, और फांसी से मरे ॥ १ ॥ वाघ आदि, हाथी, राजा, चोर, शत्रु, भेड़िया, इन ने जिन को मारा, काष्ठ वा कांटे से घाव हो कर मरे जो शुद्धि तथा उपनयनादि संस्कारों से हीन रहते हुए मरे हों ॥ २ ॥ हैजा द्वारा, अन्न से, गले में ग्रास अटक जाने से, बन के अग्नि से, अतीसार (अधिक दस्तों के होने से) डाकिनी आदि से, ग्रहों (राहु आदि) से ग्रस्त (पकड़े हुए), बिजली पड़ने से, ॥ ३ ॥ स्पर्श न करने योग्य वा अपवित्र दशा (विष्ठा मूत्रादि में पड़के) में, पतित होके और पुत्रहीन हो कर जो मरे हों इन पैंतीश ३५ प्रकारों से मरे मनुष्यों की अच्छी गति नहीं होती है ॥ ४ ॥ पितादि तीन (पिता, पितामह, प्रपितामह, ) पिण्डों के भागी, उन से पहिले तीन लेप भागी, उनसे पहिले तीन नान्दीमुखश्राद्धभागी और उन से भी पहिले तीन अश्रुमुख पितर कहलातेहैं ॥५॥ ये बारह पितृगण श्राद्ध तर्पणादि से तृप्त हुये पुत्रादि की सन्तति बढ़ाते हैं। और श्राद्धादि न किये जावें तो वे ही पुत्रादि की सन्तति को नष्ट करते हैं ॥ ६ ॥ इसी श्लो० में कहे व्याघ्रादि दश के द्वारा मरे हुए पितर