सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

पृष्ठ 495, कुल 805 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 495

३० | शङ्खस्मृतिः ॥

श्रीकामस्तुतथापद्मैर्विल्वैःकाञ्चनकामुकः ॥ २१ ॥
ब्रह्मवर्चसकामस्तु पयसाजुहुयात्तथा ।
घृतप्लुतैस्तिलैर्वह्निं जुहुयात्सुसमाहितः ॥ २२ ॥
गायत्र्ययुतहोमाच्च सर्वपापःप्रमुच्यते ।
पापात्मालक्षहोमेन पातकेभ्यःप्रमुच्यते ॥ २३ ॥
अभीष्टंलोकमाप्नोति प्राप्नुयात्काममीप्सितम् ।
गायत्रीवेदजननी गायत्रीपापनाशिनी ॥ २४ ॥
गायत्र्याःपरमंनास्ति दिविचेहचपावनम् ।
हस्तत्राणप्रदादेवी पततांनरकार्णवे ॥ २५ ॥
तस्मान्नामभ्यसेन्नित्यं ब्राह्मणोनियतःशुचिः ।
गायत्रीजाप्यनिरतं हव्यकव्येषुभोजयेत् ॥ २६ ॥
तस्मिन्नन्तिष्ठतेपापमम्बुबिन्दुरिवपुष्करे ॥ २७ ॥
जप्येनैवतुसंसिध्येद् ब्राह्मणोनात्रसंशयः ।


को चाहने वाला कमलों से सुवर्ण को चाहने वाला विल्व फलों से गायत्री मन्त्र द्वारा होम करे ॥२१॥ जो ब्रह्म तेज को चाहे, वह दूध से गायत्री द्वारा होम करे और भली प्रकार सावधानी से घी मिले तिलों से ॥ २२ ॥ दश हजार गायत्री द्वारा किये होम से सब पापों से छूट जाता है। और बड़ा पापी मनुष्य भी लक्ष गायत्री के होम से पातकों से छूट जाता है ॥ २३ ॥ तथा वह वाँछित लोक को और वाञ्छित फल को प्राप्त होता है। गायत्री वेदों की माता और पापों को नाश करने वाली है ॥ २४ ॥ इस लोक तथा परलोक-स्वर्ग में गायत्री से अधिक पवित्र करने वाला कोई नहीं है। नरक रूप समुद्र में गिरने वाले मनुष्यों को हाथ पकड़ कर रक्षा करने वाली गायत्री ही है ॥ २५ ॥ तिस से नियम पूर्वक शुद्धता से ब्राह्मण नित्य गायत्री का अभ्यास नाम जप करे । गायत्री के जप में तत्पर ब्राह्मण को हव्य (जो अन्न देवताओं के लिये बनाया हो ) और कव्य (जो पितरों के निमित्त हो) सो जिमावे ॥ २६ ॥ क्योंकि उस ब्राह्मण में पाप इस प्रकार नहीं ठहरते जैसे कमल के पत्ते पर जल की बूंद ॥ २७ ॥ जप से ही ब्राह्मण सिद्धि को प्राप्त हो जाता है इसमें संशय नहीं है, वह ब्राह्मण चाहे अन्य कोई पुण्य का काम