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सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

सम्राट अशोक के अभिलेख (शिलालेख, स्तम्भलेख एवं गुहालेख - मूल प्राकृत, ब्राह्मी एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Inscriptions of Emperor Ashoka with Hindi Commentary

देवानांप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक (सम्पादक: जनार्दन भट्ट) द्वारा

DevanagariHindipublished80 पृष्ठ

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सम्राट अशोक के अभिलेख
विषयानुक्रमणिका
सम्राट अशोक : संक्षिप्त परिचय ....................................................[i]
संकेतचिन्ह ............................................................................[ix]
खंड १ (शिला अभिलेख)
मूल अभिलेख + हिंदी रूपांतर
गिरनार शिला प्रथम अभिलेख .................................................... २
गिरनार शिला द्वितीय अभिलेख ................................................... २
गिरनार शिला तृतीय अभिलेख ................................................... ४
गिरनार शिला चतुर्थ अभिलेख ................................................... ४
कालसी शिला पंचम अभिलेख .................................................... ६
गिरनार शिला षष्ठ अभिलेख .................................................... ८
गिरनार शिला सप्तम अभिलेख ................................................. १०
गिरनार शिला अष्टम अभिलेख ................................................. १०
गिरनार शिला नवम अभिलेख ................................................. १२
गिरनार शिला दशम अभिलेख ................................................. १४
गिरनार शिला एकादश अभिलेख .............................................. १४
गिरनार शिला द्वादश अभिलेख ................................................. १६
शाहबाजगढ़ी शिला त्रयोदश अभिलेख ...................................... १८
गिरनार शिला चतुर्दश अभिलेख ............................................. २२
धौली शिला प्रथम पृथक अभिलेख .......................................... २२
जौगड शिला द्वितीय पृथक अभिलेख ......................................... २६
खंड २ (लघु शिला अभिलेख)
मूल अभिलेख + हिंदी रूपांतर
लघु शिला: रूपनाथ ............................................................ ३४
लघु शिला: कोलकाता-वैराट ................................................ ३६
लघु शिला: ब्रह्मगिरि ......................................................... ३६