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सर्वकोश
आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

Aryabhatiya of Aryabhata with Hindi Commentary

आचार्य आर्यभट (४७६ ई.) / पं. उदयनारायण सिंह द्वारा

DevanagariSanskritpublished134 पृष्ठ

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पृष्ठ 134

ग्रन्थ का प्रामाण्य माना जाता है। आज तक इस अमूल्य ज्योतिष के ऊपर
ऐसा अपूर्व विचार नहीं किया गया था इस की भूमिका के १५० पृष्ठों में
प्रायः संस्कृत ज्योतिष, अङ्गरेजी आदि ज्योतिष, वेद, ब्राह्मणादि पुस्तकों से
भारतवर्षीय ज्योतिषशास्त्र का गौरव सिद्ध किया गया है। केवल इस एक ही
पुस्तक के पढ़ने से बिना गुरु प्रायः ज्योतिष के विषयों का ज्ञाता हो सकता है।
पिङ्गलसूत्र सटीक सानुवाद। मूल्य १॥)
वेदार्थ समझने के लिये-छन्दोग्रन्थ की भी आवश्यकता है। स्थान २
में छन्दो विशेष का विधान है, इसी कारण गायत्री उष्णिक, अनुष्टुप, बृहती,
पंक्ति, त्रिष्टुप, जगती, इन सात छन्दों का वर्णन तथा मगण, यगण आदि
छन्द सम्बन्धी वैदिक तथा लौकिक छन्दों का वर्णन है। बिना छन्द ज्ञान के
वेद पढ़ना दोष लिखा है तथा बिना छन्द ज्ञान के मन्त्रों का अर्थ भी ठीक २
समझ में नहीं आ सकता क्योंकि बिना षडङ्ग के वेद का तात्पर्य समझना
आहोपुरुषिकामात्र है। यद्यपि श्रुतबोध, वृत्त रत्नाकर आदि भी छन्दोग्रन्थ
हैं परन्तु-उन में वैदिक छन्दों का कुछ भी वर्णन नहीं है अतएव हम ने बड़े
परिश्रम से-वेद के छः अङ्गों में से पिङ्गलकृत छन्दसूत्र पर हलायुधकृत वृत्ति
सहित का अति उपयोगी सरल भाषानुवाद किया है। उत्तम चिकने कागज
पर अत्यन्त शुद्ध छपा है।
नीचे लिखे पुस्तक शीघ्र छपेंगे।
१-सिद्धान्तशिरोमणि—पं भास्कराचार्य कृत ज्योतिष का ग्र.
(गोलाध्याय) संस्कृत टीका और भाषानुवाद एवं उपयुक्त-चित्र सहित मू०२)
२-सचित्र भारतवर्षीय प्राचीन भूगोल।
नाम ही से समझ जाइये-वाल्मीकीय तथा महाभारत आदि के समय
के देशों की स्थिति का-चित्र, रावण, वालि, तथा भगवान् रामचन्द्र जी के
राज्य के भिन्न २ रंग दे कर नकशा छापा जावेगा २॥)
३-सर्वदर्शनसंग्रह-माधवाचार्यकृत—जिस में १६ दर्शन
और जिस में आस्तिक नास्तिक, दर्शनों का सिद्धान्त लिखा है। संस्कृत और
भाषानुवाद सहित और भूमिका में सब दर्शनों पर गूढ़ विचार तथा-अङ्गरेजी
में भी प्रत्येक दर्शन का खुलासा लिखा गया है मूल्ये—२॥)
इस में नीचे लिखे दर्शन हैं; इन का अलग २ दाम इस प्रकार होगा।
१ चार्वाक =), बौद्ध =), आर्हत ।), रामानुज ।), पूर्णप्रज्ञ =), पाशुपत =), शैव
दर्शन =), प्रत्यभिज्ञान =), रसेश्वर =), न्याय =), वैशेषिक =), मीमांसा =)
पाणिनीय =), सांख्य =), पातञ्जल ।) और शाङ्करदर्शन ०॥) है।
पता-उदयनारायणसिंह—'शास्त्रप्रकाश' कार्यालय
मधुरापुर, विशुनपुर, मुजफ्फरपुर।
Recd. on 23.4.75 LIBRARY
D. D. No. 6803