अर्थसंग्रह (लौगाक्षि भास्कर - पूर्वमीमांसा न्याय एवं धर्म-मीमांसा सटीक)
Arthasangraha of Laugakshi Bhaskara with Hindi Commentary
लौगाक्षि भास्कर द्वारा
( २ )
बर्हिष्—कुश | षोडशी—यज्ञविशेष
भ्रातृव्य—शत्रु | सदन—स्थान
यवागू—हलुआ | संदंश—संडशी के सदृश मंत्रद्वयमध्य
याज्या—मंत्र विशेष | पठित मंत्र विशेष
रथकार—नीच शूद्र विशेष | सवनीय—यज्ञमध्यविहित पशुविशेष
रशना—घोड़े की लगाम ( रस्सी ) | समाख्या—योगशक्ति
लिङ्ग—रूढिशक्ति | समुदायापूर्व—धर्मविशेष
वाजपेय { पानयोग्य सुराविशेष | सद्यस्क—सोम यागविशेष
{ तत्साध्य यागविशेष | साधन—उपाय ( हेतु )
| साध्य—उद्देश्य ( प्रयोजन )
त्रिकृतियाग—कतिपय अङ्गरहित याग | सान्नाय्य—ऐन्द्र याग
विशेष | सुत्या—सोमरसनिच्योतनकाल
शाब्दीभावना—शब्दनिष्ठप्रवर्तन | सोम { अमरलता-रसविशेष-
व्यापारविशेष | { तत्साध्य-यागविशेष
श्येनाभिचार—वाजपक्षिखननसाध्य- | सौत्य—यज्ञमध्यदिन-कृत्यविशेष
याग विशेष | स्योन—समीचीन
श्रुति—प्रमाणान्तरनिरपेक्ष शब्दविशेष | स्वर्ग—सुख विशेष