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सर्वकोश
अपरोक्षानुभूति (दीपिका व हिन्दी टीका सहित)

अपरोक्षानुभूति (दीपिका व हिन्दी टीका सहित)

Aparokshanubhuti with Dipika & Hindi Commentary

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास / गीताप्रेस · खेमराज श्रीकृष्णदास / गीताप्रेस · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished109 पृष्ठ

पृष्ठ 67, कुल 109 में से

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पृष्ठ 67

संस्कृतटीका-भाषार्टीकासहिता । ( ६१ )
अतिसूक्ष्मकी तरह दीखै है तिसी प्रकार अज्ञानवशसे इस
आत्मामें देहका ज्ञानहै ॥ ८० ॥
सूक्ष्मत्त्वेसर्वभावानां स्थूलत्वं चोपने-
त्रतः ॥ तद्वदा० ॥ ८१ ॥
सं. टी. सूक्ष्मत्वेइति ॥ ८१ ॥
भा. टी. जिस प्रकार अतिसूक्ष्म वस्तुओंकाभी उपनेत्र
अर्थात् दूरवीन आदिसे अतिस्थूल वस्तुकी तरह बोध होय
है तिसी प्रकार अज्ञान वशसे इस आत्मामें देहका ज्ञानहै ॥८१॥
काचभूमौजलत्वंवा जलभूमौहिका
चता ॥ तद्वदा० ॥ ८२ ॥
सं. टी. काचभूमाविति ॥ ८२ ॥
भा. टी. जिस प्रकार काँचकी भूमिमें जलकी बुद्धि होय
है और जलकी भूमिमें काँचकी बुद्धि होयहै तिसी प्रकार
अज्ञान वशसे आत्मामें देहज्ञान है ॥ ८२ ॥
यद्वदग्नौ मणित्वं हि मणौ वा वह्निता
पुमान् ॥ तद्वदा० ॥ ८३ ॥
सं. टी. यद्वदिति ॥ ८३ ॥
भा. टी. जिस प्रकार भ्रमसे अग्निमें मणिकी बुद्धि होय
है और मणिमें अग्निकी बुद्धि होय है तिसी प्रकार अज्ञान
वशसे आत्मामें देहका ज्ञानहै ॥ ८३ ॥