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अपरोक्षानुभूति (दीपिका व हिन्दी टीका सहित)

अपरोक्षानुभूति (दीपिका व हिन्दी टीका सहित)

Aparokshanubhuti with Dipika & Hindi Commentary

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास / गीताप्रेस · खेमराज श्रीकृष्णदास / गीताप्रेस · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished109 पृष्ठ

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पृष्ठ 108

( १०२ ) अपरोक्षानुभूतिः ।
श्रीविद्यारण्यमुनिविरचिताऽपरोक्षानुभूतिदीपिका समा-
प्तिमगमत् ॥
इति श्रीशङ्कराचार्य्यविरचिता रुहेलखण्डान्तःपातिरा-
मपुरवास्तव्यश्रीयुतभोलानाथआत्मजपण्डितरा-
मस्वरूपद्विवेदिगौडविरचितभाष्यास-
मलङ्कृता चापरोक्षानुभूतिः समा-
प्तिमफाणीत् । श्रीहरि-
हराभ्यामर्पये ।
इदं पुस्तकं खेमराजश्रीकृष्णदास इत्यनेन स्वकीये " श्रीवेङ्कटे-
श्वर" स्टीम्मुद्रणयंत्रालयेऽङ्कयित्वा प्रसिद्धिमानितम् ।
संवत् १९६५ शके १८३०.
सर्व प्रकारका पुस्तक मिलनेका पत्ता
पं. गोपीनाथ गंगाविष्णु बुकसेलर.
भुलेश्वर चकला फोफलवाडी बम्बई नं २.
सूचीपत्रकेवास्ते टिकट भेज देना.