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सर्वकोश
अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu

भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा

DevanagariHindipublished535 पृष्ठ

पृष्ठ 45, कुल 535 में से

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अथांशकाधिकारः — 350
ताराधिकारः — 351
तारानामानि सफलं — 351
अथाधिनायकमाह — 353
अधिपतिनामानि — 353
अथायुष्यत्थाविनाशः — 354
तथा च शुभानि — 355
वास्तुकर्मे अशुभानि — 355
शास्त्रच्छन्दनिर्णयोनाम सप्तषष्टितमं सूत्रम् ॥ 67 ॥ 357-363
छन्दश्चतुर्विधमाह — 357
तेषां अभिधानपङ्क्तिमाह — 358
निबन्धमाह — 358
गुणाः — 359
अथार्याच्छन्दोद्भूत छन्दं — 359
प्रकरणादीनां — 359
अङ्गाष्टमाह — 360
क्षराक्षरापदादीनां — 360
अक्षरानुसारेण नानावृत्तनामाह — 360
इत्यमनन्तर गणश्छन्दमाह — 361
समविषमवृत्तानि — 362
आर्यावृत्तनाह — 362
गृहप्रासादसम्भूतच्छन्दभेदो नामाष्टषष्टितमं सूत्रम् ॥ 68 ॥ 363-375
मण्डपानि — 366
वितानानि — 366
शाला नामानि — 366
पीठानि — 366
विविध लिङ्गनामानि — 366
वेदाश्रादि पीठिकाः — 367
अथार्चा — 367
नगरादीनां — 367