अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)
Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu
भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा
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अवकहोडाचक्रज्योतिषं ज्योतिषफलं पञ्चचत्वारिंशं सूत्रम् ॥ 45 ॥ 217-226
योनिवैरमाह — 218
अथाष्टकवर्गमाह — 219
अथोष्टतरीदशामाह — 220
सूर्यदशाफलमाह — 221
चन्द्रदशाफलमाह — 221
अथाङ्गारकदशाफलमाह — 221
बुधदशाफलमाह — 222
शनिदशाफलमाह — 222
गुरुदशाफलमाह — 222
राहवादशाफलमाह — 222
शुक्रदशाफलमाह — 222
चन्द्रस्य द्वादशावस्थामाह — 223
तस्यफलमाह — 223
जन्मानुसारेणचन्द्रशासफलमाह — 224
चन्द्र-ताराबलमाह — 225
ज्योतिषलक्षणत्मकं षट्चत्वारिंशं सूत्रम् ॥ 46 ॥ 227-233
अधोमुखीनक्षत्रं — 227
ऊर्ध्वमुखीनक्षत्रं — 227
राक्षसगुणप्रधानाः — 228
मनुष्यगुणप्रधानाः — 228
देवगुणप्रधानाः — 228
सूर्यपातस्ययोगमाह — 229
क्षेत्राधिपत्याह — 229
ग्रहमैत्री — 230
लग्नघटिकाप्रमाणं — 231
दिवानिशालग्नानि — 231
विप्रादीनाभिधानं — 231
गणितक्षेत्रनिर्णयो नाम सप्तचत्वारिंशं सूत्रम् ॥ 47 ॥ 233-239
गणितपादं — 234