अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)
Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu
भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा
पृष्ठ 38, कुल 535 में से
संदर्भ में पढ़ेंxxxix
युगवर्णनमाह — 136
कल्कि अवतारवर्णनं — 137
वैष्णवावतारकीर्तन फलमाह — 138
विष्णुवाक्योद्धवारण्ये श्रीसोमेश्वरनिर्णयो नाम त्रिंशं सूत्रम् ॥ 30 ॥ 139-145
अथाश्रमवर्णनमाह — 141
विष्णुवाक्योद्धवसोमनाथोक्तद्वादशशिवरात्रि
निर्णयो नामैकत्रिंशं सूत्रम् ॥ 31 ॥ 146-152
शिवरात्र्युत्सवविधिं — 149
द्वादशोत्सवनामानि — 150
मासानुसारं चतुर्दश्यां सफलञ्च — 150
शिवरात्रिमाहात्म्यमाह — 152
विश्वकर्मावतारो नाम द्वात्रिंशं सूत्रम् ॥ 32 ॥ 153-156
पृथुपृथिवीसंवादे भूर्लोके विश्वकर्मागमनं त्रयस्त्रिंशं सूत्रम् ॥ 33 ॥ 157-160
जयविजयसिद्धार्थपृच्छा नाम चतुस्त्रिंशं सूत्रम् ॥ 34 ॥ 160-164
जयपृच्छादीनां परिचयमाह — 161
ग्रन्थोत्पत्तिवर्णनं — 163
एकविंशतिस्वर्गा नाम पञ्चत्रिंशं सूत्रम् ॥ 35 ॥ 164-169
पृथ्वीप्रमाणमाह — 164
स्वर्गपातालनामादीनां — 165
नागकुलनामश्च — 166
धरत्यां द्वीपनामानि — 167
सागरनामानि — 168
स्वर्गनामानि — 168
महापर्वतप्रमाण षट्त्रिंशं सूत्रम् ॥ 36 ॥ 169-172
विश्वकर्मोवलोकितपृथ्वीनवखण्डानिं सप्तत्रिंश सूत्रम् ॥ 37 ॥ 172-176
दिव्यवर्षवर्णनम् — 174
भारतक्षेत्रग्रामसङ्ख्यानृपराज्यप्रमाणमष्टात्रिंशं सूत्रम् ॥ 38 ॥ 176-180
वनयात्रानामैकोनचत्वारिंशं सूत्रम् ॥ 39 ॥ 180-185
उपवनदीनां लक्षणं — 180