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सर्वकोश
अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu

भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा

DevanagariHindipublished535 पृष्ठ

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पृष्ठ 35

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अष्टशक्त्युद्भवो नाम षष्ठं सूत्रम् ॥ ६ ॥ 29-32
अथाष्टशक्तिनामावलिः — 30
तस्यवंशाः — 30
विप्रक्षत्रियवैश्यशूद्राणां गोत्रसंख्याः — 32
सृष्टिसंसारावतारणं सप्तमं सूत्रम् ॥ ७ ॥ 32-36
सप्तपातालराज्योद्भवो नामाष्टमं सूत्रम् ॥ ८ ॥ 36-41
नवकुलनागराजनामावली — 36
पद्मेशराज्यवासिनामाह — 37
कर्कोटकराज्यवासिनामाह — 38
पुण्डरीकराज्यनिवासिनामाह — 39
अथानन्तराज्यनिवासिनामाह — 39
रसातलनिवासिनामाह — 40
इत्यमनन्तर पातालनिवासिनामाह — 40
भूराज्यनिवेशानो नाम नवमं सूत्रम् ॥ ९ ॥ 42-45
जम्बूद्वीपवर्णनमाह — 43
नवक्षेत्रनामानि — 43
तत्रैव गन्धर्वविद्याधराक्षनिवासिनामाह — 44
संसारभूतग्रामोत्पत्तिपञ्चतत्त्वनिर्णयो नाम दशमं सूत्रम् ॥ १० ॥ 45-50
षडाश्रयाः — 48
एवं योगादीनामाह — 48
पञ्चतत्त्वपञ्चगुणनिर्णयो नामैकादशं सूत्रम् ॥ ११ ॥ 50-54
पिण्डनिर्माणचरणमाह — 51
इत्यमनन्तरमहाभूतादिकमाह— 53
गर्भविज्ञानोद्भवो नाम द्वादशं सूत्रम् ॥ १२ ॥ 54-57
कृतयुगानुरूपेणज्ञानमाह — 55
कर्मज्ञानोद्भवो नाम त्रयोदशं सूत्रम् ॥ १३ ॥ 58-62
हंसयोगसाधनमाह — 60
हृदयकमलमाह — 61
शरीरस्थगुणदोषादीनां — 62