अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)
Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary
भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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अर्जुनस्य महीपालैर्नानादेशसमागतैः ॥ २७ ॥
पृथ्वीनाथ! इस प्रकार भिन्न-भिन्न स्थानोंमें नाना देशोंसे आये हुए राजाओंके साथ
अर्जुनको अनेक बार युद्ध करने पड़े ॥ २७ ॥
यानि तूभयतो राजन् प्रतप्तानि महान्ति च ।
तानि युद्धानि वक्ष्यामि कौन्तेयस्य तवानघ ॥ २८ ॥
निष्पाप नरेश! जो युद्ध दोनों पक्षके योद्धाओंके लिये अधिक कष्टदायक और महान्
थे, अर्जुनके उन्हीं युद्धोंका मैं यहाँ तुमसे वर्णन करूँगा ॥ २८ ॥
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि अश्वानुसरणे
त्रिसप्ततितमोऽध्यायः ॥ ७३ ॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें अर्जुनके द्वारा अश्वका
अनुसरणविषयक तिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ७३ ॥