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सर्वकोश
अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary

भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 236, कुल 421 में से

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पृष्ठ 236

मेधावी श्रीकृष्णने उन सबका आदर करके उनका कुशल-समाचार पूछा और
प्रसन्नतापूर्वक अपने माता-पिताके चरणोंमें प्रणाम किया ॥ १९ ॥
ताभ्यां स सम्परिष्वक्तः सान्त्वितश्च महाभुजः ।
उपोपविष्टैः सर्वैस्तैर्वृष्णिभिः परिवारितः ॥ २० ॥
उन दोनोंने उन महाबाहु श्रीकृष्णको अपनी छातीसे लगा लिया और मीठे वचनोंद्वारा
उन्हें सान्त्वना दी। इसके बाद सभी वृष्णिवंशी उनको घेरकर आस-पास बैठ गये ॥ २१ ॥
स विश्रान्तो महातेजाः कृतपादावनेजनः ।
कथयामास तत्सर्वं पृष्टः पित्रा महाहवम् ॥ २१ ॥
महातेजस्वी श्रीकृष्ण जब हाथ-पैर धोकर विश्राम कर चुके, तब पिताके पूछनेपर
उन्होंने उस महायुद्धकी सारी घटना कह सुनायी ॥ २१ ॥
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि कृष्णस्य द्वारकाप्रवेशे
एकोनषष्टितमोऽध्यायः ॥ ५९ ॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें श्रीकृष्णका
द्वारकाप्रवेशविषयक उनसठवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ५९ ॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ १/२ श्लोक मिलाकर कुल २४ १/२ श्लोक हैं)