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सर्वकोश
अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary

भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 168, कुल 421 में से

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पृष्ठ 168

यथा द्रव्यं च कर्ता च संयोगोऽप्यनयोस्तथा ।
यह निश्चित बात है कि पुरुषके भोगनेयोग्य द्रव्यमात्रकी संज्ञा सत्त्व है तथा जैसे द्रव्य
और कर्ताका सम्बन्ध है, वैसे ही इन दोनोंका सम्बन्ध है ॥ १३ १/२ ॥
यथा प्रदीपमादाय कश्चित् तमसि गच्छति ।
तथा सत्त्वप्रदीपेन गच्छन्ति परमैषिणः ॥ १४ ॥
जैसे कोई मनुष्य दीपक लेकर अन्धकारमें चलता है, वैसे ही परम तत्त्वको चाहनेवाले
साधक सत्त्वरूप दीपकके प्रकाशमें साधनमार्गपर चलते हैं ॥ १४ ॥
यावद् द्रव्यं गुणस्तावत् प्रदीपः सम्प्रकाशते ।
क्षीणे द्रव्ये गुणे ज्योतिरन्तर्धानाय गच्छति ॥ १५ ॥
जबतक दीपकमें द्रव्य और गुण रहते हैं, तभीतक वह प्रकाश फैलाता है। द्रव्य और
गुणका क्षय हो जानेपर ज्योति भी अन्तर्धान हो जाती है ॥ १५ ॥
व्यक्तः सत्त्वगुणस्त्वेवं पुरुषोऽव्यक्त इष्यते ।
एतद् विप्रा विजानीत हन्त भूयो ब्रवीमि वः ॥ १६ ॥
ब्रह्माजीका ऋषियोंको उपदेश