अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)
Anubhashya on Brahma Sutras by Mahaprabhu Vallabhacharya with Commentary
महाप्रभु वल्लभाचार्य (टीकाकार: गोस्वामी पुरुषोत्तम जी महाराज) द्वारा
DevanagariHindipublished2,600 पृष्ठ
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- द्वि - ध - र - ण - ...
Wait, "जगद्विधरण":
ज - ग - द्वि - ध - र - ण:
Is it "जगद्विधरण" or "जगद्विधारण"?
In line 30: "पतित्वजगद्विधरणसर्वेश्वरत्वादयः" -> look at 'ध': no aa-matra! It says "जगद्विधरण".
Wait, Br. Up. 4.4.22: "एष सर्वेश्वर एष भूताधिपतिरेष भूतपाल एष सेतुर्विधरण एषां लोकानामसंभेदाय".
"सेतुर्विधरणः" has "विधरण"! So "जगद्विधरण" is directly from the Upanishad! Excellent!
Line 31:
ऽर्थान्तरभूतो नामरूपयोर्निर्वहिता आकाश इत्येवं पूर्वसूत्रशेषत्वेन योजयन्ति । न तु क्षमते कुतो न
Wait: "नामरूपयोर्निर्वहिता" or "नामरूपयोर्निर्वोढा"?
Look at line 31: "ना - म - रू - प - यो - र्नि - र्व - हि - ता" -> "नामरूपयोर्निर्वहिता"!
Wait, Upanishad says "आकाशो ह वै नामरूपयोर्निर्वहिता" (Chandogya 8.14.1).
Yes, "नामरूपयोर्नि