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सर्वकोश
अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

Anubhashya on Brahma Sutras by Mahaprabhu Vallabhacharya with Commentary

महाप्रभु वल्लभाचार्य (टीकाकार: गोस्वामी पुरुषोत्तम जी महाराज) द्वारा

DevanagariHindipublished2,600 पृष्ठ

पृष्ठ 919, कुल 2600 में से

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पृष्ठ 919
  • द्वि - ध - र - ण - ...
    Wait, "जगद्विधरण":
    ज - ग - द्वि - ध - र - ण:
    Is it "जगद्विधरण" or "जगद्विधारण"?
    In line 30: "पतित्वजगद्विधरणसर्वेश्वरत्वादयः" -> look at 'ध': no aa-matra! It says "जगद्विधरण".
    Wait, Br. Up. 4.4.22: "एष सर्वेश्वर एष भूताधिपतिरेष भूतपाल एष सेतुर्विधरण एषां लोकानामसंभेदाय".
    "सेतुर्विधरणः" has "विधरण"! So "जगद्विधरण" is directly from the Upanishad! Excellent!

Line 31:
ऽर्थान्तरभूतो नामरूपयोर्निर्वहिता आकाश इत्येवं पूर्वसूत्रशेषत्वेन योजयन्ति । न तु क्षमते कुतो न
Wait: "नामरूपयोर्निर्वहिता" or "नामरूपयोर्निर्वोढा"?
Look at line 31: "ना - म - रू - प - यो - र्नि - र्व - हि - ता" -> "नामरूपयोर्निर्वहिता"!
Wait, Upanishad says "आकाशो ह वै नामरूपयोर्निर्वहिता" (Chandogya 8.14.1).
Yes, "नामरूपयोर्नि