अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)
Anubhashya on Brahma Sutras by Mahaprabhu Vallabhacharya with Commentary
महाप्रभु वल्लभाचार्य (टीकाकार: गोस्वामी पुरुषोत्तम जी महाराज) द्वारा
पृष्ठ 2107, कुल 2600 में से
संदर्भ में पढ़ेंस्तितिक्षुर्दुःखसहिष्णुः"! Wonderful!
Now look at the rest of line 11:
"श्रद्धावित्त आस्तिक्यबुद्धिमानात्मन्येवात्मानं पश्येत्सात्मनि शारीरे"
Wait, "पश्येत्सात्मनि"?
Look at "पश्येत्सात्मनि":
प - श्ये - त् - स्वा - त्म - नि?
Look at 'स्वा': there is a 'वा' under 'स'!
"पश्येत्स्वात्मनि शारीरे"
Wait, let's zoom in on "पश्येत्स्वात्मनि":
प (pa) - श्ये (śye) - त् (t) - स्वा (svā) - त्म (tma) - नि (ni)!
Yes, look at the loop at the bottom of 'स्': that's 'व' with 'ा' -> 'स्वा'!
"पश्येत्स्वात्मनि शारीरे" (in his own self, the bodily self). That makes complete sense!
Line 12:
"पूर्वोक्तमात्मानमक्षरं पश्येत् । अर्हे कृत्यतृचश्चेति लिङ् । दर्शनार्ह इत्यर्थः । एवं दर्शनार्हतामुक्त्वा"
Wait, Panini sutra: "अर्हे कृत्यतृचश्च" (3.3.169)!
So "अर्हे कृत्यतृचश्चेति लिङ् ।" - perfect!