अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)
Anubhashya on Brahma Sutras by Mahaprabhu Vallabhacharya with Commentary
महाप्रभु वल्लभाचार्य (टीकाकार: गोस्वामी पुरुषोत्तम जी महाराज) द्वारा
पृष्ठ 1933, कुल 2600 में से
संदर्भ में पढ़ेंधिकरण: "मयट्" प्रत्यय!
Wait, "न मयट् शिरोरूपा"? No!
Look at the characters:
'न' '्' 'न' 'म' 'य' 'शि' 'रो' 'रू' 'पा'?
Wait, look at the first consonant after ला:
Is it 'न्' 'न' (nna)? Yes, 'न्न'!
Then 'म' (ma).
Then 'य' (ya).
Then 'शि' (shi) 'रो' (ro) 'रू' (rū) 'पा' (pā).
Wait, before 'न्न' is there 'अ'?
Look: 'ल' 'ा' then 'ऽ' then 'न्न'?
Wait, look at line 29:
"व्याप्ता खकलाऽन्नमयशिरोरूपा" - why would it be annamaya-shirorūpā?
Wait! "अन्नमयं हि सोम्य मनः, आपोमयः प्राणः, तेजोमयी वाक्" (Chhandogya 6.5.4).
And in line 31: "मनोमये 'आकाश आत्मे'ति मनोमये श्रावणम्"!
LOOK AT LINE 31-32:
"मनोमये 'आकाश आत्मे'ति मनोमये श्रावणम्, तस्य न ग्रहणम्, आत्मरूपस्याकाशस्योपासनानुपयोगात् ।"
YES! MANOMAYA!